छत्तीसगढ़ में पहली दफा, इस्लामिक कोर्ट के तलाक का फैसला निचली अदालत में शून्य

रायपुर, गुरुवार 28 अप्रैल 2022

छत्तीसगढ़ में पहली दफा, इस्लामिक कोर्ट के तलाक का फैसला निचली अदालत में शून्य

देश के इतिहास में संभवतः पहली दफा निचली अदालत ने किसी इस्लामिक कोर्ट के फैसले के विपरीत फैसला सुनाते हुए इस्लामिक कोर्ट के आदेश को शून्य घोषित किया है। मामला रायपुर के विद्यानगर स्थित इदारा खास खबर

ए शरिया नामक इस्लामिक कोर्ट द्वारा

पारित तलाक के फैसले का है, जिसे चतुर्थ

न्यायाधीश ओमप्रकाश साहू के कोर्ट ने शून्य घोषित किया है।

कोर्ट ने की यह टिप्पणी

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि इदारा ए शरिया का काम मुस्लिम समुदाय के व्यक्तियों के लिए धार्मिक

व सामाजिक सहायता पहुंचाना है। इसके अलावा इमारत व सामाजिक संस्थाओं का निर्माण करना है। उक्त नियमावली में इदारा ए शरिया इस्लामिक कोर्ट का उल्लेख होना दर्शित नहीं है। कोर्ट ने तलाक के फैसले को शून्य घोषित करते हुए कहा है कि किसी मी प्राधिकारी या पर्सनल लॉ को न्यायिक शक्ति का प्रयोग करने का अधिकार नहीं है। सिवाय विधि द्वारा स्थापित न्यायालय के

कोर्ट ने कहा- न्यायिक शक्ति का प्रयोग करने का अधिकार नहीं

फैसला हाईकोर्ट में विचाराधीन

एक अन्य मसले में एक महिला ने बिलासपुर हाईकोर्ट में इदारा ए शरिया नामक इस्लामिक कोर्ट के तलाक संबंधित फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। उक्त मामले में कोर्ट ने वारा ए शरिया द्वारा दिए गए निर्णय पर स्टे आर्डर दिया है। मामले की कार्यवाही हाईकोर्ट में चल रही है।

नहीं सुना सकते न्यायिक प्रक्रिया के विपरीत फैसला

मुस्लिम मसलो के जानकार तथा महिला वकील शमीम रहमान के मुताबिक किसी भी समुदाय या संस्था द्वारा बनाए गए संगठन का काम सामाज में एकता स्थापित करने के अलावा धार्मिक, सामाजिक आयोजन करना है। सामाजिक विवादों को आपस में सुलझाना है। इदारा ए शरिया का भी इसी तरह का काम है। इदारा ए शरिया भारतीय संविधान द्वारा स्थापित न्यायिक प्रक्रिया के विपरीत फैसला नहीं सुना सकता है

लोक अभियोजक के.के शुक्ला के मुताबिक सैयद हैदर अली का उसकी पत्नी रेशमा शेख के साथ इदारा ए शरिया ने तलाक करने का फैसला 27 मार्च 2015 को सुनाया था। इस्लामिक कोर्ट के फैसले के खिलाफ हैदर अली ने कोर्ट में परिवाद दायर किया। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने इस्लामिक कोर्ट द्वारा सुनाए गए फैसले को शून्य घोषित किया है। कोर्ट के मुताबिक इदारा ए शरिया का काम सामाजिक, धार्मिक कार्य करने के अलावा आपसी विवाद आपस में निपटाने का है।

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