रमज़ान का चाँद नज़र आते ही बड़ों के साथ-साथ बच्चों में भी रहमतों वाले महीने में रोज़ा रखने का एक ख़ास उत्साह और जज़्बा दिखा। वहीं संजय नगर निवासी 8 साल की शेख़ हुमैरा फ़ातिमा बिन्ते शेख़ दानिश ने अपनी ज़िंदगी का पहला रोज़ा मुक़म्मल किया, अपनी बड़ी बहन को रोज़ा रखे देख शेख़ आयशा फ़ातिमा ने भी सुबह से खाने-पीने से इनकार कर दिया और इस रोज़े में अपनी बहन का साथ दिया। इफ़्तार के बाद उनके वालिद-वालिदा, दादा-दादी और चाचा-चाची ने साथ मिलकर बच्चों के साथ मिलकर इस पहले रोज़े की खुशियाँ मनाई और बच्चों की हौसला-अफ़ज़ाई के साथ सभी ने मुह मीठा किया।
शेख़ हुमैरा फ़ातिमा अभी दूसरी कक्षा में है और साथ दीनी तालीम भी हासिल कर रहीं हैं और बड़े होकर टीचर बनने का इरादा रखतीं हैं।
इस साल रमज़ान अप्रेल माह की भीषण गर्मी में आया इसके बावजूद बड़ों और बच्चों में अपने रब के लिए इबादत और रोज़ा रखने का जज़्बा मज़बूती के साथ क़याम है।

