सूर्य देव को अर्ग के साथ समाप्त हुआ छठ महापर्व, कोरोना को देखते हुए घर पर ही बनाया घाट – अनु अरुण सिंह
बिहार : आज सुबह सूर्य देव को जल अर्पित करने के साथ ही छठ महापर्व का समापन हुआ. छठ महापर्व की पूरी जानकारी देते हुए समाजसेवी अनु अरुण सिंह ने बताया कि छठ की शुरुआत नहाए खाए से होती है और सुबह घाट पर खत्म होती है.
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष तिथि को छठ का पर्व मनाया जाता है. छठ पूजा का व्रत संतान के खुशहाली एवं मनोकामना की पूर्ति के लिए किया जाता है.
छठ पूजा के बारे में समाजसेवी अनु सिंह ने बताया कि इस व्रत सुर्यापसना किया जाता है. इस पर्व की व्रत महिलाएं ही नही पुरुष भी करते हैं. छठ पूजा का महत्व बहुत ज्यादा है. यह व्रत सूर्य भगवान, उषा, प्रकृति, जल, वायु आदि को समर्पित है. इस व्रत को मुख्यतः बिहार में मनाया जाता है.
साथ ही श्रीमती सिंह ने बताया कि यह व्रत संतान की रक्षा और उनके जीवन की खुशहाली के लिए किया जाता है. व्रत का फल सैकड़ों यज्ञों के फल की प्राप्ति से भी ज्यादा होता है. सिर्फ संतान ही नहीं बल्कि परिवार में सुख समृद्धि की प्राप्ति के लिए भी यह व्रत किया जाता है.
अनु सिंह ने छठ पूजा का इतिहास के बारे में बताते हुए कहा “पौराणिक कथा के अनुसार, एक राजा था जिसका नाम प्रियंवद था. राजा की कोई संतान नहीं थी. संतान प्राप्ति के लिए राजा ने यज्ञ करवाया. यज्ञ महर्षि कश्यप ने संपन्न कराया और यज्ञ करने के बाद महर्षि ने प्रियंवद की पत्नी मालिनी को आहुति के लिए बनाई गई खीर प्रसाद के रुप में ग्रहण करने के लिए दी. खीर खाने से उन्हें पुत्र प्राप्ति हुई लेकिन उनका पुत्र मरा हुआ पैदा हुआ.
यह देख राजा बेहद व्याकुल और दुखी हो गए. राजा प्रियंवद अपने मरे हुए पुत्र को लेकर शमशान गए और पुत्र वियोग में अपने प्राण त्यागने लगे. इस समय ब्रह्मा की मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुईं. देवसेना ने राजा से कहा कि वो उनकी पूजा करें. देवी सृष्टि की मूल प्रवृति के छठे अंश से उत्पन्न हुई हैं. यही कारण है कि ये छठी मईया कही जाती हैं.
जैसा माता ने कहा था ठीक वैसे ही राजा ने पुत्र इच्छा की कामना से देवी षष्ठी का व्रत किया. व्रत करने से राजा प्रियंवद को पुत्र की प्राप्ति हुई. कहा जाता है कि छठ पूजा संतान प्राप्ति और संतान के सुखी जीवन के लिए किया जाता है.
इसके साथ ही पिछले 2 वर्षों से कोरोनावायरस की वजह से जो विपदा हम सब को झेलनी पड़ रही है वह सारी सावधानियों को देखते हुए इस साल अनु अरुण सिंह ने अपने घर के बाहर घाट बनाकर छठ पूजा की.

