एसईसीएल गेवरा की उत्पादन क्षमता विस्तार के लिए प्रस्ताव को ईएसी ने खारिज किया

एसईसीएल गेवरा की उत्पादन क्षमता विस्तार के लिए प्रस्ताव को ईएसी ने खारिज किया

ऊर्जाधानी सन्गठन ने कहा जब तक विस्थापितों की समस्या का समाधान नही तब तक विरोध जारी रहेगा ।

गेवरा/दीपका:-
पर्यावरण ,वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय नई दिल्ली की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति EXPERT APPRAISAL COMMITTEE (कोल माइनिंग ) की 2 सितम्बर को देश के विभिन्न कोयला खदानों के संदर्भ में अयोजित बैठक में एसईसीएल की गेवरा परियोजना के खदानों में 49 मिलियन टन प्रतिवर्ष उत्पादन क्षमता को 70 मिलियन टन प्रतिवर्ष बढाने के लिए प्रस्ताव को शामिल किया गया था । इस प्रस्ताव को जिले और खदान क्षेत्र में पर्यावरणीय दुष्प्रभाव के साथ साथ भूविस्थापितो की मूलभूत समस्याओ के मद्देनजर खारिज करने की माँग करते हुए ऊर्जाधानी भुविस्थापित किसान कल्याण समिति की ओर से विरोध दर्ज कराई गई थी । गौरतलब है कि एसईसीएल गेवरा परियोजना की क्षमता में विस्तार 49 से 70 एमटीपीए और लीज एरिया में 4184.46 हेक्टेयर से 4781.789 हेक्टयर विस्तार करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था इस परियोजना को 2009 से लेकर 2020 तक की अवधि में 35 से 45 एमटीपीए तक के क्षमता विस्तार की अनुमति बिना जन सुनवाई की प्रक्रिया के ही मिल गई थी इसी तरह से अभी तीन महीने पहिले ही 49 एमटीपीए के क्षमता विस्तार की अनुमति भी दे गयी थी | जबकि इससे पूर्व भी बार बार पर्यावरणीय स्वीकृति की नियम एवं शर्तों के लगातार उल्लंघन और उससे उत्पन्न समस्याओं का विवरण प्रस्तुत किया गया था । परियोजना द्वारा लगातार किए जा रहे पर्यावरण नियमों के उल्लंघन का कोरबा के लोगों के जीवन और आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव, हैवी ब्लास्टिंग से होने वाले दुष्प्रभाव से लोगों के घरों की दीवारों, घर की छतों और बोरवेल को हुई क्षति साथ ही भूमिगत जल पर होने वाले प्रभावों ,सार्वजनिक सड़कों से लगातार कोयला परिवहन का बढ़ता दबाव, कोयला परिवहन और इसके कारण सड़कों की खराब हालत, कोल डस्ट, धूल एवं दुर्घटनाएं के कारण उतपन्न विषम स्थिति का जिक्र अपने विरोध पत्र में सन्गठन द्वारा प्रस्तुत किया गया था । विश्व में सबसे प्रदूषित शहरों में से एक कोरबा में निवासरत लोगों और समुदायों के स्वास्थ्य पर पर्यावरण प्रदूषण की समस्या को सामने रखी गयी थी । ऊर्जाधानी सन्गठन की ओर से आपत्ति किया गया था कि गेवरा एक बड़ी कोयला खनन परियोजना है किन्तु परियोजना हेतु आखिरी जनसुनवाई 2008 में हुई थी उसके बाद 2009 से लेकर अब तक इस परियोजना की क्षमता विस्तार होता रहा लेकिन इसे जनसुनवाई से छूट मिली हुई थी और अभी मात्र 3 माह के भीतर ही उत्पादन क्षमता विस्तार का प्रस्ताव रखा जा रहा था । सन्गठन की ओर से आम और प्राभावितो को पर्यावरणीय लोक सुनवाई के प्रति जागरूकता पूर्ण कार्यवाही के पश्चात जन सुनवाई आयोजित करने की मांग की गई है ।

ऊर्जाधानी भुविस्थापित किसान कल्याण समिति ने उत्पादन क्षमता विस्तार और क्षेत्र विस्तार के प्रस्ताव को ईएसी द्वारा रद्द कर दिए जाने के बाद अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि जब तक क्षेत्र से संबंधित समस्याओं का समाधान नही किया जाता है तब तक विस्तार का विरोध कार्यवाही जारी रहेगा । यह भी मांग किया गया है कि जो जांच कमेटी बनाई गई है उसमें भूविस्थापितो को भी शामिल किया जाए । ताकि वास्तविक तथ्यों का आंकलन करने में मदद मिल सके ।

भवदीय
(सपुरन कुलदीप)
अध्यक्ष
Mo. 9827176944 ubkks31610@gmail.com

                         प्रेषक
                   ललित महिलांगे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *