एसईसीएल गेवरा की उत्पादन क्षमता विस्तार के लिए आज ईएसी बैठक में प्रस्ताव
उर्जाधानी संगठन ने प्रस्ताव खारिज करने की मांग रखी
पर्यावरण ,वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय नई दिल्ली की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति EXPERT APPRAISAL COMMITTEE (कोल माइनिंग ) की आज 2 सितम्बर को देश के विभिन्न कोयला खदानों के संदर्भ में बैठक हो रही है । जिसमे एसईसीएल की गेवरा परियोजना के खदानों में 49 मिलियन टन प्रतिवर्ष उत्पादन क्षमता को 70 मिलियन टन प्रतिवर्ष बढाने के लिए प्रस्ताव को शामिल किया गया है । इस प्रस्ताव को जिले और खदान क्षेत्र में पर्यावरणीय दुष्प्रभाव के साथ साथ भूविस्थापितो की मूलभूत समस्याओ के मद्देनजर खारिज करने की माँग करते हुए ऊर्जाधानी भुविस्थापित किसान कल्याण समिति की ओर से विरोध दर्ज कराई गई है । मेल के जरिये कमेटी के चेयरमेन सहित सभी सदस्यों को यहां व्याप्त समस्याओ से अवगत कराया गया है । वर्ष 1980-81 में गेवरा परियोजना के अस्तित्व में आने के बाद अपने क्षमता 11 मिलियन टन प्रतिवर्ष से अधिक 18 मिलियन टन वार्षिक कर विश्व रिकार्ड बनाया था । कुछ ही वर्षो में अपने क्षमता में विस्तार करते हुए 26 मिलियन टन कर दिया गया तीन माह पूर्व ही बिना जनसुनबाई के 45 मिलयन टन को 49 मिलयन टन विस्तार की अनुमति दी गयी है और अब 70 मिलयन टन उत्पादन के लिए प्रस्ताव रखी गयी है।
श्री गुरुराज पी.कुंडरगी चेयरमैन , ईएसी (कोल माइनिंग सेक्टर) केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय नईदिल्ली को सबोन्धित आपत्ति पत्र में छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित गेवरा ओपन कास्ट कोयला खदान परियोजना से प्रभावित ग्रामवासी और जिले में विस्थापन से जुडी समस्याओ से जूझ रहे लोंगो के एकमात्र ईमानदार सन्गठन उर्जाधानी भुविस्थापित किसान कल्याण समिति की ओर से क्षमता विस्तार पर रोक लगाने की मांग किया गया है गौरतलब है कि साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के द्वारा गेवरा ओपन कास्ट कोयला खदान परियोजना तहसील कटघोरा जिला कोरबा के क्षमता में विस्तार 49 से 70 एमटीपीए और लीज एरिया में 4184.46 हेक्टेयर से 4781.789 हेक्टयर विस्तार करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है और इस संबंध में 02 सितम्बर 2021 को ईएसी की बैठक नियत है | पत्र में उल्लेख किया गया है कि इस परियोजना को 2009 से लेकर 2020 तक की अवधि में 35 से 45 एमटीपीए तक के क्षमता विस्तार की अनुमति बिना जन सुनवाई की प्रक्रिया के ही मिल गई थी इसी तरह से अभी तीन महीने पहिले ही 49 एमटीपीए के क्षमता विस्तार की अनुमति भी दे गयी थी जिसका पूर्व में भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी | यही कारण है जब इस परियोजना के क्षमता विस्तार के प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाते हैं तो हम नियमित रूप से ईएसी को लिखित में परियोजना के प्रभाव के संबंध में अवगत कराते हैं| पूर्व के सभी पत्रों के माध्यम से परियोजना द्वारा पर्यावरणीय स्वीकृति की नियम एवं शर्तों के लगातार उल्लंघन और उससे उत्पन्न समस्याओं का विवरण प्रस्तुत किया गया है| मौजूदा समस्याओं और उससे जुड़े तथ्यों के आधार पर प्रस्ताव को निरस्त किए जाने का निवेदन करते हुए कहा गया है :-
🔹 1. परियोजना द्वारा लगातार किए जा रहे पर्यावरण नियमों के उल्लंघन का कोरबा के लोगों के जीवन और आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है:-
ईएसी को पूर्व प्रेषित पत्रों में निम्नलिखित बिंदुओं को उठाया गया है और एक बार फिर संक्षेप में प्रस्तुत किया गया है क्योंकि परियोजना के प्रस्तावक द्वारा हाल ही में किए गए अध्ययनों के बावजूद इन समस्याओं की कोई सुनवाई नहीं हुई है:
i. हैवी ब्लास्टिंग से होने वाले दुष्प्रभाव:-
खदान के लगातार विस्तार से इसकी सीमाओं में बसे हुए गांव में ब्लास्टिंग से होने वाली समस्याएं अत्यधिक गंभीर है| ब्लास्टिंग से होने वाली समस्याओं के संबंध में हमारे द्वारा पिछले कई वर्षों में बहुत सी शिकायतें संबंधित विभाग को प्रेषित की जा चुकी है और आपको पूर्व में प्रेषित पत्रों में हमने हैवी ब्लास्टिंग और कंपन से लोगों के घरों की दीवारों, घर की छतों और बोरवेल को हुई क्षति साथ ही भूमिगत जल पर होने वाले प्रभावों के संबंध में लिखा है|
ii. सार्वजनिक सड़कों से लगातार कोयला परिवहन का बढ़ता दबाव:-
कोरबा में सार्वजनिक सड़कों से बड़े पैमाने पर हो रहे कोयला परिवहन और इसके कारण सड़कों की खराब हालत, कोल डस्ट, धूल एवं दुर्घटनाएं अत्यंत चिंताजनक विषय है| जिले में परिवहन मामलों के लिए टास्क फोर्स के होने के बावजूद और खनन परियोजनाओं द्वारा पर्यावरणीय नियमों के तहत सड़क मार्ग से कोयला परिवहन से उत्पन्न प्रदूषण नियंत्रण एवं सड़क मार्ग से कोयला परिवहन का दबाव कम से कम करने की दिशा में हुए कार्य वास्तविक रूप से अपर्याप्त और खानापूर्ति है|
▪️ कुसमुंडा कोरबा मुख्य मार्ग जो कोयला परिवहन से जर्जर है आज तक की स्थिति में इस मार्ग के पुनर्निर्माण का कार्य ठीक तरह से शुरू ही नहीं है|
▪️• कंपनी द्वारा इसके ईआईए रिपोर्ट में कन्वेयर सिस्टम, दो नए साइलों और नए साइडिंग बनाना प्रस्तावित है किंतु इस दिशा में कंपनी अब तक कोई कार्य नहीं किया है| बड़े पैमाने पर आज भी गेवरा खदान से कोयले का परिवहन सड़कों के माध्यम से हो रहा है| कंपनी द्वारा वाशरी में कोयला परिवहन और रोड डिस्पैच जारी है|
▪️• iii.कोरबा जैसे प्रदूषित क्षेत्रों में स्वास्थ्य और इस पर होने वाले प्रभाव को लेकर जरूरी अध्ययन और अवलोकन का अभाव है:
कोरबा जैसे क्षेत्र जिसका औद्योगिकरण कोयले पर आधारित है और जिसे विश्व में सबसे प्रदूषित शहरों में से एक होने की उपाधि मिली है| ऐसे क्षेत्र में जहां निवासरत लोगों और समुदायों के स्वास्थ्य पर पर्यावरण प्रदूषण के प्रभावों के संबंध में बहुत ही कम अध्ययन हुआ है| पर्यावरण प्रभाव आंकलन की प्रक्रिया में स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव का केवल सतही आंकलन होता आया है| वर्ष 2020 में छत्तीसगढ़ के स्टेट हेल्थ सेंटर द्वारा कोरबा में प्रदूषण के स्तर और समुदायों पर इसके प्रभाव के संबंध में एक रिपोर्ट जारी की गई है| उस रिपोर्ट को संज्ञान में लेना आवश्यक है साथ ही खनन परियोजनाओं से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों के बेहतर अध्ययन की बहुत आवश्यकता है|
🔹 2. परियोजना प्रस्तावक जिस लोक सुनवाई की प्रक्रिया के होने का दावा कर रही है वह पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना 2006 के अनुसार नहीं हुई है:
गेवरा एक बड़ी कोयला खनन परियोजना है| इस परियोजना हेतु आखिरी जनसुनवाई 2008 में हुई थी| उसके बाद 2009 से लेकर अब तक इस परियोजना की क्षमता विस्तार होता रहा लेकिन इसे जनसुनवाई से छूट मिली | इस परियोजना के 70 एमटीपीए लक्ष्य में से फेस-I 49 एमटीपीए क्षमता मे चलना निर्धारित है|
2009 के बाद से जिस प्रकार इस परियोजना को बिना जनसुनवाई क्षमता विस्तार की स्वीकृति मिलती आई है, उसे स्पष्ट है कि मंत्रालय के ऑफिस मेमोरेंडम का लाभ उठाकर कंपनी लगातार ऐसे ही बिना जनसुनवाई के विस्तार करती रहेगी| जिन ऑफिस मेमोरेंडम के आधार पर कंपनी अपने प्रस्तावित विस्तार में जनसुनवाई से छूट चाहती आई है उसके लिए जो आवश्यक नियम एवं शर्त का पालन किया जाना है वह कंपनी ने पूरे नहीं किए हैं| कंपनी टुकड़ों में विस्तार कर असल में जन सुनवाई की प्रक्रिया से बचना चाहती है| ईएसी की अनुशंसा पर जारी जनसुनवाई से छूट के सर्कुलर का कंपनी फायदा उठा रही है ऐसा ही चलता रहा तो 70 एमटीपीए तक का विस्तार भी बिना किसी जनसुनवाई के हो जाएगा| यह असल में जमीनी समस्याओं को बाहर आने से रोकने से तरीका बन चुका है ताकि आसानी से विस्तार की स्वीकृति प्राप्त की जा सके| इस बात का उल्लेख हमने पूर्व के पत्रों में भी किया है जो सत्य हो रही है और मात्र 3 माह के भीतर ही विस्तार का प्रस्ताव रखा जा रहा है |
इसके अलावा,2006 के ईआईए अधिसूचना के अनुसार,ईआईए रिपोर्ट के मसौदे के प्रकाशन के बाद एक लोक सुनवाई आयोजित होनी चाहिए| इस मामले में परियोजना प्रस्तावक ने ईआईए रिपोर्ट के लिए परिशिष्ट तैयार किया है, वह 2006 की ईआईए अधिसूचना की मूल भावना के अनुसार नहीं है और इसे ईएसी में मान्य नहीं किया जाना चाहिए| ईएसी को इसके बजाय प्रस्तावक को नए सिरे से जन सुनवाई करने का निर्देश देना चाहिए क्योंकि पिछली बार 2008 में परियोजना के एक लोक सुनवाई हुई थी और उसके बाद से सही मायने में जनसुनवाई ही नहीं हो रही है |
🔹 3. केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा जारी मानवेंद्र सिंह रिपोर्ट अनुपालन के लिए केवल कूछ ही पहलुओं पर केंद्रित है:
मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा प्रस्तुत मॉनिटरिंग रिपोर्ट में और परियोजना प्रस्तावक द्वारा प्रस्तुत आवेदन में केवल उन शर्तों को जोड़ा गया है जिनका पहले “आंशिक रूप से अनुपालन हुआ है” या “अनुपालन नहीं हुआ है”| हालांकि एक परियोजना के क्षमता विस्तार के दौरान पर्यावरणीय स्वीकृति की शर्तों के अनुपालन का इतिहास एक महत्वपूर्ण कारक है जो यह निर्धारित करने में मदद करता है कि विस्तार की अनुमति दी जा सकती है या नहीं| ऐसा करने के लिए यह आवश्यक है कि सभी शर्तों के अनुपालन की स्थिति को देखा जाए, न कि केवल उन परिस्थितियों को, जिन्हें पहले आंशिक या गैर-अनुपालन के रूप में देखा गया था | इसलिए तैयार की गई मानिटरिंग रिपोर्ट केवल आंशिक है और इस पर विचार नहीं किया जाना चाहिए | इसके बजाय, सभी शर्तों के अनुपालन की स्थिति वाली एक रिपोर्ट तैयार की जानी चाहिए|
🔹 4. ईआईए रिपोर्ट के परिशिष्ट को गलत आधारभूत डेटा का उपयोग करके तैयार किया गया है:
बेसलाइन डाटा जिसके आधार पर ईआईए रिपोर्ट का परिशिष्ट तैयार किया गया है वह अक्टूबर 2020 का है| इसके साथ दो बड़ी समस्याएं हैं| सबसे पहले, कोरबा में अक्टूबर के महीने में आमतौर पर वर्षा होती है| अक्टूबर 2020 में,13 दिन ऐसे थे जिसमें वर्षा हो रही थी| यह सर्वविदित तथ्य है कि बारिश स्वाभाविक रूप से धूल को कम करने में मदद करती है परिणामस्वरूप,1 महीने के दौरान लिया गया बेसलाइन डाटा जिसमें लगभग आधे समय वर्षा होती रही वह सटीक नहीं है |
🔹 5. प्रस्तावित नए साइडिंग हेतु पर्यावरणीय नियमानुसार अनुमति प्राप्त की गई है या नहीं इसकी जांच हो:
नए रेलवे साइडिंग के निर्माण और साइलो तथा कन्वेयर सिस्टम को आधार बनाकर या कहा जा रहा है कि सड़क मार्ग से परिवहन कम से कम किया जाएगा| इस उपाय से भी समस्या का हल नहीं निकल पाएगा| कोयला साइडिंग से भी गंभीर कोल डस्ट उत्पन्न होता है और इसकी स्थिति चिंताजनक है क्योंकि कोरबा में चल रही सभी कोयला साइडिंग पर्यावरणीय नियमों के विपरीत जाकर बिना अनुमति संचालित की जा रही है| ऐसे उदाहरण हैं जहां साइडिंग से होने वाले प्रदूषण के आस-पास निवासरत लोगों की समस्याएं हो रही है| इन साइडिंग से लोडिंग सिर्फ साइलों के द्वारा ही नहीं बल्कि ट्रकों द्वारा डम्प किए गए कोयले को जेसीबी से रेल वैगन में लोड किया जाता है जिससे बहुत वायु प्रदूषण होता है| गेवरा को जूनाडीह कोयला साइडिंग में वायु प्रदूषण की स्थिति गंभीर है और जहां किसी विंड ब्रेकर की स्थापना नहीं की गई है|
🔹 6. IIT,BHU द्वारा किया गया कैरिंग एपीसीटी अध्ययन उपलब्ध नहीं कराया गया है:
ईएसी ने परियोजना प्रस्ताव को निर्देश दिया था कि वह आईआईटी,बीएचयू द्वारा परिस्थितिकी तंत्र की कैरीइंग कैपेसिटी अध्ययन पूर्ण करावाएं| ईआईए रिपोर्ट के परिशिस्ट में केवल अध्ययन से प्राप्त प्रमुख अनुशंसा पर प्रकाश डाला गया है| अनुशंसाए शमन उपायों के रूप में है| अगर पूरी रिपोर्ट ईएसी को उपलब्ध करा दी गई होती तो, ईएसी को शमन उपाय तैयार करने में मदद मिलती| इस प्रकार,परियोजना के विस्तार के संबंध में निर्णय लेने से पहले अध्ययन को उपलब्ध कराया जाना चाहिए|
उपरोक्त परियोजना द्वारा पर्यावरणीय शर्तों के उल्लंघन से समस्याओं को बार-बार उठाये जाने के बाद भी इस परियोजना को तीन माह पूर्व मार्च 2021 में ही 49 एम पी टी ए चलने की अनुमति मिल चुकी है| इसे तब तक क्षमता विस्तार की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए जब तक कि परियोजना से प्रभावित लोगों को समस्याओं का समाधान नहीं हो जाता साथ ही अनुशंसाओ का पूर्ण रूप से क्रियान्वयन जब तक ना हो जाए इस परियोजना की क्षमता विस्तार को स्वीकृति नहीं दी जानी चाहिए|
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