बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर जी की 130वी जयंती परिवार सहित घर पर मनाकर किया शत शत नमन- कांग्रेस प्रदेश सचिव राजेन्द्र बंजारे।

बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर जी की 130वी जयंती परिवार सहित घर पर मनाकर किया शत शत नमन- कांग्रेस प्रदेश सचिव राजेन्द्र बंजारे।
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छत्तीसगढ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश सचिव एवम पूर्व जनपद अध्यक्ष राजेंद्र पप्पू बंजारे ने बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर जी की 130वी जयंती परिवार सहित घर पर मनाकर बाबा साहब जी को नमन करते हुए कहा कि डॉ.बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर जी का जीवन संघर्ष और सफलता की ऐसी अद्भुत मिसाल है जो शायद ही कहीं और देखने को मिले. Indian Caste System की बुराइयों के बीच जन्मे बाबासाहेब ने बचपन से ही उपेक्षा और असमानता का आघात झेला। कोई आम आदमी इन आघातों से कमजोर पड़ जाता पर बाबासाहेब तो कुछ अलग ही मिटटी के बने थे; इन आघातों ने उन्हें वज्र सा मजबूत बना दिया और अपनी असीम इच्छाशक्ति और मेहनत के बल पर उन्होंने एक आधुनिक भारत के निर्माण में बहुत बड़ा योगदान दिया। रायपुर के
पूर्व जिला पंचायत सदस्य एवम जिला कांग्रेस कमेटी रायपुर ग्रामीण अनुसूचित जाति विभाग की पूर्व जिलाध्यक्ष श्रीमती संतोषी बंजारे ने बाबा साहिब भीमराव अम्बेडकर को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि आंबेडकर बहूत प्रतिभाशाली एवं जुंझारू लेखक थे। भीमराव अम्बेडकर को 6 भारतीय और 4 विदेशी ऐसे कुल दस भाषाओं का ज्ञान था,अंग्रेजी, हिन्दी, मराठी, पालि, संस्कृत, गुजराती, जर्मन, फारसी, फ्रेंच और बंगाली ये भाषाएं वे जानते थे। भीमराव ने अपने समकालिन सभी राजनेताओं की तुलना में सबसे अधिक लेख लिखा है। सामाजिक संघर्ष में हमेशा सक्रिय और व्यस्त होने के बावजुद भी उनकी इतनी सारी किताबें, निबंध, लेख एवं भाषणों का इतना बडा यह संग्रह वाकई अद्भुत है। वे असामान्य प्रतिभा के धनी थे और यह प्रतिभा एवं क्षमता उन्होंने अपने कठीन परिश्रम से हासिल की थी। वे बडे साहसी लेखक या ग्रंथकर्ता थे, उनकी हर किताब में उनकी असामान्य विद्वता एवं उनकी दुरदर्शता का परिचय होता है।
पूर्व जनपद अध्यक्ष राजेंद्र बंजारे ने आगे कहा कि भीमराव अम्बेडकर बाबा साहेब के नाम से लोकप्रिय ,भारतीय विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ और समाज सुधारक थे। उन्होंने अनुसूचित जाति बौद्ध आंदोलन को प्रेरित किया और अनुसूचित जाती के खिलाफ सामाजिक भेद भाव के विरुद्ध अभियान चलाया। बाबा साहब ने अनुसूचित जातियों, जनजातियों और समाज के पिछड़े वर्गो के लिए अतुलनीय संघर्ष किया। उन्होंने सामाजिक भेदभाव को दूर करने और समानता का सिद्धांत लागू करने के लिए भारतीय संविधान का मार्ग चुना। उन्होंने कहा कि हमें डॉ. अंबेडकर के आर्थिक और सामाजिक सुधार के विचारों को साकार करने के प्रयास करने होंगे।

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