छत्तीसगढ़ बंद : चक्का जाम, धरना और प्रदर्शन, तीनों कानूनों की 28 को जलाई जाएगी होली

छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन (CGKA)

छत्तीसगढ़ बंद : चक्का जाम, धरना और प्रदर्शन, तीनों कानूनों की 28 को जलाई जाएगी होली

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति और 500 से अधिक किसान संगठनों के साझे मोर्चे संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर छत्तीसगढ़ में भी छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन और छत्तीसगढ़ किसान सभा सहित इससे जुड़े अन्य घटक संगठनों ने तीनों कृषि विरोधी कानूनों को वापस लेने, सी-2 लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का कानून बनाने, पेट्रोल-डीजल-गैस की कीमतों को आधा करने, मजदूर विरोधी श्रम संहिता को वापस लेने तथा बैंक-बीमा-कोयला-रेलवे जैसे देश के सार्वजनिक प्रतिष्ठानों के निजीकरण की मुहिम पर रोक लगाने की मांग पर भारत बंद का समर्थन करते हुए चक्का जाम किया और धरना देकर प्रदर्शन क़िया। आंदोलन की यह कार्यवाही प्रशासन द्वारा लगाई गई धारा 144 का उल्लंघन करते हुए आयोजित की गई।

यह जानकारी एक बयान में छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन के संयोजक सुदेश टीकम, आलोक शुक्ला, संजय पराते, नंद कश्यप, रमाकांत बंजारे आदि ने दी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ किसान सभा के बैनर तले सैकड़ों किसानों ने आज कोरबा जिले के हरदी बाजार में किसान सभा नेता जवाहर कंवर, प्रशांत झा, मोहम्मद हुसैन, वीएम मनोहर, नंदलाल कंवर आदि के नेतृत्व में बिलासपुर-कोरबा मार्ग पर दो घंटे से ज्यादा समय तक चक्का जाम किया, जिसके कारण मुख्य मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गई। किसान सभा के राज्य अध्यक्ष संजय पराते भी यहां शामिल थे। सरगुजा और सूरजपुर में पांच स्थानों पर ऋषि गुप्ता, बालसिंह, कपिल पैकरा, कृष्ण कुमार लकड़ा व बिफन नागेश के नेतृत्व में धरना दिया गया और अडानी-अम्बानी-मोदी के पुतले जलाए गए।

राजनांदगांव में जिला किसान संघ के नेता सुदेश टीकम और सीटू नेता गजेंद्र झा के नेतृत्व में बंद कराने निकले मजदूर-किसानों के जत्थे को पुलिस ने रास्ते में ही रोक लिया। दुर्ग-बेमेतरा जिला किसान संघ के रमाकांत बंजारे के नेतृत्व में धमधा में सैकड़ों किसानों ने रैली निकालकर प्रदर्शन किया।

छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन के नेताओं ने कहा है कि हमारे देश के किसान न केवल अपने जीवन-अस्तित्व और खेती-किसानी को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं, बल्कि वे देश की खाद्यान्न सुरक्षा, सार्वजनिक वितरण प्रणाली तथा संप्रभुता की रक्षा के लिए भी लड़ रहे हैं। उनका संघर्ष उस समूची अर्थव्यवस्था के कारपोरेटीकरण के खिलाफ भी हैं, जो नागरिकों के अधिकारों और उनकी आजीविका को तबाह कर देगा। इसलिए देश का किसान आंदोलन इन काले कानूनों की वापसी के लिए खंदक की लड़ाई लड़ रहा है और अपनी अटूट एकता के बल पर इस आंदोलन को तोड़ने की सरकार की साजिशों को मात दे रहा है। उन्होंने बताया कि इस देशव्यापी आंदोलन को तेज करने के लिए पूरे प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर किसान पंचायतें आयोजित करने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। किसान नेताओं ने बताया कि इस आंदोलन के अगले चरण में 28 मार्च को तीनों किसान विरोधी कानूनों और मजदूर विरोधी श्रम संहिता की होली जलाई जाएगी।

(सुदेश टीकम, आलोक शुक्ला, संजय पराते आदि द्वारा जारी)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *