गर्भस्थ शिशुओं की देखभाल हुई आसान

गर्भस्थ शिशुओं की देखभाल हुई आसान

लोकेशन–सुकमा

स्लग-छत्तीसगढ़ शासन द्वारा बस्तर अंचल को कुपोषण के अभिशाप से दूर करने के प्रयास ला रहा रंग

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा बस्तर अंचल को कुपोषण के अभिशाप से दूर करने के प्रयास रंग लाते दिख रहे हैं। खासकर गरीब तबके की कामकाजी महिलाएं इन योजनाओं से काफी खुश हैं।
अपनी रोजीरोटी के लिए सुबह से ही जुझने वाली इन महिलाओं के कंधे में घर-परिवार के लिए साजोसामान जुटाने से लेकर परिवार के देखभाल तक की जिम्मेदारी होती है। ऐसी स्थिति में गर्भावस्था में भी ये अपने सेहत की देखभाल नहीं कर पाती हैं। सुकमा जैसे वनाच्छादित जिले में लघु वनोपज के संग्रहण से अपना जीवन निर्वाह करने वाली इन महिलाओं के लिए मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान और संवरता सुकमा कार्यक्रम किसी वरदान से कम नहीं है। सुबह से ही वनोपज संग्रहण के लिए जंगलों की ओर जाना और घर आते ही घरेलू कामकाज में जुट जाने वाली इन महिलाओं को आंगनबाडियों में परोसे जा रहे गरमा गरम पौष्टिक भोजन से काफी राहत मिली है।

सुपोषण योजना से धीरमनी, यशोदा और दश्मती के जीवन में आया बदलाव

सुकमा जिला मुख्यालय के कुम्हारररास स्थित आंगनबाड़ी में गर्म भोजन योजना का लाभ उठा रही धीरमनी, यशोदा और दशमति ने बताया कि वे रोजाना आंगनबाड़ी आकर पोषण आहार ले रहीं है। जिससे उन्हें संतुलित और पौष्टिक आहार मिल रहा है। प्रोटीन, विटामिन और वसा से परिपूर्ण संतुलित सुपोषण आहार अपनाने से इनकी सेहत में सुधार हुआ है। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान से उन्हें अपनी तथा बच्चे के लिए अधिक चिंता नहीं होती, अब वे निश्चिंत होकर सेहतमंद जीवन जी रही है।

आंगनबाड़ी में परोसा जा रहा गरम और पौष्टिक भोजन

 धीरमनी ने बताया कि वे आठ माह से गर्भवती है। उन्होंने बताया कि वे प्रतिदिन आंगनबाड़ी आकर गरम भोजन लेती हैं। खाने में प्रतिदिन रोटी, दाल, चांवल, रसेदार सब्जी, हरी सब्जी, अचार, पापड़ और सलाद परोसा जाता है। इसके साथ ही पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा दिवस पर प्रतिमाह नियमित जांच व परामर्श तथा आयरन फोलिक एसिड की गोलियां खाने के लिए दी जाती हैं। गर्भवती महिला यशोदा ने बताया कि लॉकडाउन तथा कोरोना संक्रमण काल में भी मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के तहत् सूखा राशन का वितरण किया गया।

कुपोषण में आई 13 प्रतिशत की कमी

महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी अतुल परिहार ने बताया कि जिले में 956 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं जिनमें पंजीकृत लगभग 2900 गर्भवती महिलाओं को सुपोषण योजना के तहत लाभान्वित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुपोषण के चक्र को तोड़ने के लिए बच्चों को गर्भ से ही अच्छे पोषण आहार की जरुरत होती है। इसके साथ ही महिलाओं को किशोरावस्था तक पर्याप्त मात्रा में पोषक आहार देने पर आने वाली पीढ़ी सेहतमंद होगी। इसलिए शासन द्वारा छः माह से लेकर 6 वर्ष तक के शिशु के साथ ही गर्भवती और शिशुवती माताएं व किशोरी बालिकाओं को महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से पोषक आहार दिया जा रहा है। इसके अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष जिले के बच्चों में कुपोषण की दर की दर 45.12 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 33 प्रतिशत रह गया है।

सुकमा से जिला ब्युरो संजय सिंह भदौरिया की रिपोर्ट

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *