जैतखाम प्रतीक है शांति, एकता और भाईचारे का, पूर्व जनपद अध्यक्ष राजेंद्र बंजारे।

जैतखाम प्रतीक है शांति, एकता और भाईचारे का, पूर्व जनपद अध्यक्ष राजेंद्र बंजारे।


बाबा गुरुघासीदास जी समस्त मानव समाज के गुरु
’मनखे-मनखे एक समान’ का संदेश देने वाले बाबा गुरु घासीदास की 267 जयंती ग्राम तुलसी, एवम खुशबू गार्डन मोवा में धूमधाम से मनाया गया। उस अवसर पर तुलसी बाराडेरा में सतनाम भवन का भूमिपूजन भी हुआ।खुशबू गार्डन मोवा में सतनामी उत्थान एवम जागृति समिति द्वारा इस अवसर पर ’जैतखाम’ की पूजा कर सफेद झंडा चढ़ाया गया। साथ ही जैतखाम में ठेठ छत्तीसगढ़िया रोटी-पिठा (मिठाई) भी चढ़ाया गया। सतनामी उत्थान एवम जागृति समिति के प्रदेश अध्यक्ष जयबहादुर बंजारे मीडिया प्रभारी राजेन्द्र पप्पू बंजारे दिनेश खूंटे, अश्वनी बबलू त्रिवेंद्र, मनोज बंजारे, पप्पू बंदे ने बताया कि बाबा की जयंती पर एक खास नृत्य है, जिसे ’पंथी नृत्य’ है। बता दें कि गुरु घासीदास के घासीदास की जन्मस्थली गिरौदपुरी में एशिया का सबसे बड़े जैतखाम की स्थापना की गई है, जो दिल्ली में स्थित कुतुब मिनार से भी उंचा है।
बाबा कौन हैं गुरुघासीदास बाबा
हमारे सतनामी धर्म के प्रवर्तक हैं। बाबा घासीदास जी ने जाति-धर्म, समाजिक आर्थिक विसमता और शोषण को समाप्त कर आपसी सदभावना और प्रेम का संदेश दिया। बाबा घसीदास का समाधी स्थल बलौदाबाजार जिले के गिरौधपुरी में स्थित है, यहां हर साल हजारों लोग आते हैं।
बाबा घसीदास का जन्म 18 दिसंबर 1756 को गिरौद नामक गांव में मंहगू दास तथा माता का नाम अमरौतिन के घर हुआ था। वे बचपन से कई चमत्कार दिखाए, जिसका लोगों पर काफी प्रभाव पड़ा।
गुरु घासीदास जी ने लोगों को जात-पात की भावना को दूर कर समाज के बीच एकता का संदेश दिया। छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद वीर नारायण सिंह भी उनके सिद्धांतों से प्रभावित थे। साल 1901 के जनगणना के अनुसार लगभग 4 लाख लोग सतनाम पंत से जुड़ चुके थे, लेकिन आज बाबा घसीदास को आदर्श मानने वालों की संख्या करोड़ों में है।

जैतखाम क्या है?
जैतखाम सत्य नाम का प्रतीक जयस्तंभ है साथ ही यह सतनाम पंथ की विजय कीर्ति को प्रदर्शित करने वाली आध्यत्मिक पताका है, जैतखाम शांति, एकता और भाईचारे का प्रतीक है।।स्वेत ध्वज हमें सदैव सत्य के साथ देने और सागी पूर्ण जीवन जीने का संदेश देता है। गुरु घासीदास बाबा द्वारा प्रतिपादित समानता और मानव अधिकार पर आधारित सभी सिद्धांत आज भी मानव जीवन के बेहतरी के लिए प्रासंगिक है; उनके सिद्धांत युगों युगों तक प्रासंगिक रहेंगे। उनके सामाजिक, धार्मिक, आध्यात्मिक और शैक्षणिक आंदोलन से केवल सतनामी समाज ही नहीं वरन देश का हर जाति, वर्ण और धर्म के लोग लाभान्वित हुए हैं; गुरु घासीदास बाबा किसी एक समाज का गुरु नही है जबकि वे समूचे मानव समाज का गुरु हैं। गुरु घासीदास बाबा जी के मानव मानव एक समान का सिद्धांत समस्त सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक, आध्यात्मिक और दार्शनिक सिद्धांतों का मूल संक्षेप है। उल्लेखनीय है कि गुरु घासीदास बाबा का जन्म ऐसे समय में हुआ जब पूरे देश में सामाजिक असमानता, छुआछूत, द्वेष दुर्भावना और घृणा जैसे सामाजिक वर्गो में बटा हुआ था।

पूर्व जनपद अध्यक्ष राजेंद्र बंजारे ने आगे बताया कि आज गुरु घासीदास बाबा जी की 264 जयंती है, गुरु घासीदास बाबा के द्वारा सामाजिक चेतना के लिए किए गए योगदान को किसी एक लेख में समाहित कर पाना संभव नहीं है, खासकर तब जब उनके योगदान को पूरी ईमानदारी और निष्ठा से इतिहास में लिखा न गया हो।
मनखे-मनखे एक समान : ये एक ऐसा क्रांतिकारी सिद्धांत है जो मानव को मानव बनने का अधिकार देता है। मनखे मनखे एक समान का सिद्धांत मानव के सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और आध्यात्मिक विकास और समानता के लिए अत्यंत प्रभावी रहा है।
प्रत्येक जीव के लिए दया और प्रेम : गुरु घासीदास बाबा ने केवल मानव ही नहीं बल्कि अन्य सभी जीव के अच्छे जीवन की बात कही, इसी परिपेक्ष्य में उन्होंने हिंसा, नरबलि, पशुबलि और मांसाहार का विरोध किया था। बाबा गुरुघसीदास जी के जयंती के अवसर पर तुलसी बाराडेरा में जनपद सदस्य इंदर साहू , सरपंच टूमन धीवर, पूर्व सरपंच नेमीचंद धीवर, सतनामी समाज तुलसी के अध्यक्ष जनक खेलवार, रामनारायण नवरंगे गुरुजी, उपसरपंच बसंत खांडे खेम देवांगन, मोटू पटेल,विजय बंजारे एवम पंथी पार्टी के कलाकार गण उपस्थित रहे।

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