देशव्यापी किसान आंदोलन के समर्थन में ट्रेड यूनियन, वामपंथी पार्टियां, किसान सभा ने एकजुटता प्रकट करते हुए विरोध प्रदर्शन किया

देशव्यापी किसान आंदोलन के समर्थन में ट्रेड यूनियन, वामपंथी पार्टियां, किसान सभा ने एकजुटता प्रकट करते हुए विरोध प्रदर्शन किया

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर सीटू,एटक,एचएमएस,माकपा, भाकपा,छत्तीसगढ़ किसान सभा ने आज किसान विरोधी कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर घंटाघर में अम्बेडकर के प्रतिमा के सामने धरना प्रदर्शन किए इसके साथ ही एकजुटता की कार्यवाही करते हुए किसानों की मांगों का समर्थन करते हुए उनके आंदोलन पर दमन की निंदा की। मोदी सरकार की हठधर्मिता के आगे झुकने से इंकार करते हुए आज जिले के मजदूर किसान वामपंथी संगठनों ने अपने आंदोलन को और तेज करने की घोषणा की है।

प्रदर्शन को एटक के प्रदेश महासचिव हरिनाथ सिंह,सीटू के एस एन बेनर्जी, वी एम मनोहर, जनक दास, एचएमएस के लखन लाल सहिस एटक नेता दीपेश मिश्रा माकपा और भाकपा के जिला सचिव प्रशांत झा,एमएल रजक किसान सभा के अध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर ने संबोधित किया

प्रदर्शनकारी किसान विरोधी काले कानूनों को वापस लेने की मांग करते हुए संघी गिरोह द्वारा इस आंदोलन को बदनाम करने के लिए व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी के दुष्प्रचार और ओछी हरकतों की तीखी निंदा की है और कहा है कि इससे किसान न टूटने वाले हैं और न झुकने वाले, बल्कि इससे इन कानूनों को मात देने के लिए किसानों की एकता और संकल्प और मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि ये कानून देशी-विदेशी कॉरपोरेटों और एग्रो-बिज़नेस कंपनियों की तिजोरी भरने के लिए बनाए गए हैं और सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधनों से इन कानूनों का मूल चरित्र नहीं बदलने वाला है। इसलिए इन कानूनों को वापस लिए जाने और सी-2 लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने का कानून बनाने की मांग देश के किसान कर रहे हैं। वे अपनी इस जायज मांग को सुनाने के लिए दिल्ली जाने के लिए पिछले बीस दिनों से सड़कों पर बैठे हुए हैं और 15 से ज्यादा किसान अपनी जान गंवा चुके हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की लाठी, गोलियों और दमन का पूरे साहस के साथ किसान आंदोलन मुकाबला करेगा।

वामपंथी पार्टियां, ट्रेड यूनियन, किसान सभा ने जिओ उत्पादों, अम्बानी-अडानी के मॉल्स और पेट्रोल पम्पों के बहिष्कार की भी अपील आम जनता से की है। किसान आंदोलन के नेताओं ने कहा है कि यदि मोदी सरकार इन किसान विरोधी कानूनों को वापस नहीं लेती, तो किसान संगठन भी अपना आंदोलन वापस नहीं लेंगे और कॉर्पोरेटपरस्त मोदी सरकार के खिलाफ संघर्ष और तेज किया जाएगा।

एम एल रजक
जिला सचिव भाकपा

प्रशांत झा
जिला सचिव माकपा

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