न्यायालय ने दिया टीआई अश्वनी राठौर व लक्ष्मण कुमेटी पर कार्यवाही करने का आदेश, लापरवाही व आरोपियों को बचाने में की थी दोनो ने मदद
इंट्रो, अक्सर किस्से कहानियों में कानून को लेकर कई मैं सुबह मुद्दे बनाए जाते हैं परंतु कानून अपना काम करता है यह सभी जानते हैं की न्यायालय में देर सवेर देर सवेर इंसाफ तो होता है परंतु कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की वजह से गुनाहगार बच निकलते हैं जिनको कानून पुनः कटघरे में खड़ा करता है और उन्हें सजा सुना कर पीड़ित पक्ष को इंसाफ दिलाता है ऐसा ही एक मामला न्यायालय रायपुर में बीते दिनों देखने को मिला जहां पर भ्रष्टाचार मैं सन लिप्त अधिकारियों को न्यायालय ने फटकार लगाते हुए दोषियों को बचाने व अपनी जिम्मेदारी का सही से निर्वहन न करने पर गृह मंत्रालय से इनके विरुद्ध कार्यवाही करने का आदेश दिया है
रायपुर राजधानी में जिला न्यायालय ने विधानसभा थाने के विवेचक रहे लक्ष्मण कुलेटी व थाना प्रभारी अश्वनी राठौर के खिलाफ कार्रवाई करने की अनुशंसा गृह मंत्रालय से की है प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के द्वितीय अतिरिक्त न्यायाधीश ने गृह विभाग के सचिव व पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच करने और निष्कर्ष से कोर्ट को अवगत कराने को कहा है जानकारी के मुताबिक कोर्ट ने अक्टूबर 2018 में विधानसभा थाना इलाके में हुई हत्या के मामले में बुधवार को पांच आरोपियों को बरी कर दिया था कोर्ट ने माना कि पुलिस ने इस पूरे केस की गंभीरता से नहीं लेते हुए स्तर ही जांच की इस मामले के विवेचक रहे लक्ष्मण कॉमेडी और तत्कालीन पुलिस थाना प्रभारी अश्वनी राठौर की कार्यवाही को कोर्ट ने बेहद लापरवाह पाया इनके खिलाफ कर करने के निर्देश गृह सचिव वाले को दिया है बता दें कि अक्टूबर 2018 में युवक परमानंद चतुर्वेदी की हत्या हुई थी हत्या का आरोप मृतक की चाची भगवती फुलमतिया वाह इनके परिचित उमाशंकर कैलाश धर्मेंद्र पर लगाया गया था अब तक सामने आई जानकारी के मुताबिक दोनों पक्षों में जमीन को लेकर विवाद था हत्या के बाद ही पुलिस कोर्ट में आरोपियों का अपराध सिद्ध नहीं कर पाया जिसके कारण कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया है आपको बता दें कि पूर्व में भी लक्ष्मण कुलिटी पर कई गंभीर आरोप लग चुके हैं कई फर्जी मामलों में लक्ष्मण कुलिटी द्वारा पैसा ना देने पर झूठी रिपोर्ट घड़ी गई जिसमें विधानसभा थाना अंतर्गत पत्रकार से पैसा मांगने का मामला था जिस पर वेब पोर्टल के संपादक को झूठी रिपोर्ट के माध्यम से षडयंत्र पूर्वक फसाया गया जिसका मामला कोर्ट में लंबित है! ऐसी दर्जनों शिकायतें लक्ष्मण कुलेटी के खिलाफ हुई तो थी परंतु पुलिस महकमा में ऊपर तक पहुंच होने की वजह से अक्सर लक्ष्मण कुलेटी सेटिंग कर बचता आ रहा था सूत्रों की माने तो जितने भी अवैध कारोबारी विधानसभा थाना अंतर्गत आते थे लक्ष्मण कुमेटी के संरक्षण से अपना अवैध कारोबार बिना खौफ बेरोकटोक चलाते थे इसके एवज में लक्ष्मण कुमेटी जैसे भ्रष्ट अधिकारी महीने में मोटी रकम लेकर अपनी तिजोरी भरता आ रहा है यदि इसकी सही तरीके से जांच होती है तो निश्चय ही गरीबों के साथ हुए अन्याय का सही इंसाफ हो पाएगा, अब देखना यह है कि पुलिस महकमा व गृह मंत्रालय इस अपने इस भ्रष्ट कर्मचारी पर क्या कार्यवाही करता है!

