केंद्र के कृषि विरोधी कानूनों को निष्प्रभावी करने के लिए राज्य सरकार की पहल का स्वागत किया किसान सभा ने

छत्तीसगढ़ किसान सभा (CGKS)
(अ. भा. किसान सभा – AIKS से संबद्ध)
नूरानी चौक, राजातालाब, रायपुर, छग

केंद्र के कृषि विरोधी कानूनों को निष्प्रभावी करने के लिए राज्य सरकार की पहल का स्वागत किया किसान सभा ने

केंद्र सरकार के कृषि विरोधी कानूनों को निष्प्रभावी करने के लिए विधान सभा का विशेष अधिवेशन बुलाकर कानून बनाने की राज्य सरकार की पहलकदमी का छत्तीसगढ़ किसान सभा ने स्वागत किया है। किसान सभा ने कहा है कि संविधान के संघीय ढांचे के अंतर्गत राज्यों को यह अधिकार है कि वह अपने राज्य में रह रहे किसानों के हितों की रक्षा करें। इस दिशा में पंजाब सरकार द्वारा नए कृषि कानून बनाये जाने की भी किसान सभा ने सराहना की है।

आज यहां जारी एक बयान में छग किसान सभा के राज्य अध्यक्ष संजय पराते और महासचिव ऋषि गुप्ता ने कहा है कि संविधान में कृषि का क्षेत्र राज्य का विषय है, इसके बावजूद संसदीय प्रक्रिया का घोर उल्लंघन करके और राज्यसभा में बहुमत सांसदों द्वारा इन कानूनों के विरोध की अनदेखी करते हुए ये कानून बनाये गए है। ये कानून हमारे देश की जरूरतों के अनुसार खेती-किसानी करने के किसानों के अधिकार को भी छीनते है। ये कानून किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तक की गारंटी नहीं करते। अतः केंद्र सरकार के कृषि कानून असंवैधानिक, गैर-लोकतांत्रिक तथा किसान विरोधी है।

किसान सभा नेताओं ने कहा कि इन कानूनों के जरिये सबसे बड़ा हमला मंडियों को अव्यवहारिक बनाकर फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था पर किया गया है और फसल के भाव को बाजार की व्यवस्था के भरोसे छोड़ दिया गया है, जिसका नतीजा यह होगा कि उन्हें औने-पौने भाव पर अपनी फसल अनाज मगरमच्छों को बेचने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

छत्तीसगढ़ किसान सभा ने राज्य सरकार से मांग की है कि राज्य के किसानों के हितों की रक्षा के लिए वह प्रस्तावित कृषि कानूनों में मंडी व्यवस्था को मजबूत करने, किसानों के अनाज को कहीं भी समर्थन मूल्य से नीचे खरीदने की अनुमति न होने और इसका उल्लंघन होने पर जेल की सजा होने, किसी विवाद की स्थिति में न्यायालय की शरण में जाने, राज्य सरकार द्वारा किसानों का अनाज सहकारी समितियों के जरिये खरीदने की बाध्यता होने, ठेका खेती की इजाजत न देने, खाद्यान्न को आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी में लाकर इसके भंडारण की उचित मात्रा निर्धारित करने और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत करने जैसे प्रावधानों को शामिल किया जाये। इसके अलावा सीमांत और लघु किसानों की कुर्की पर रोक और उनकी कर्ज मुक्ति के प्रावधान भी शामिल किए जाने चाहिए।

संजय पराते, अध्यक्ष
(मो) 094242-31650
ऋषि गुप्ता, महासचिव
(मो) 094062-21661

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