मजदूरों मेहनतकशों की हड्डियां निचोड़कर देशी, विदेशी पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने श्रम कानून में बदलाव लाये है मोदी-बंजारे छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव एवम पूर्व जनपद अध्यक्ष राजेंद्र पप्पू बंजारे ने संसद से हाल ही में पास किए गए नए श्रम कानूनों को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर नया तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार का काम होता है सभी लोगों की नौकरियों को सुरक्षित बनाने के लिए कानून बनाना लेकिन सरकार ने उल्टे नौकरी से हटाने के नियम ही आसान कर दिए. इससे पूंजीपतियों को फायदा पहुंचेगा लेकिन आम आदमी बेरोजगारी के संकट से त्रस्त हो जाएगा।
इस कठिन समय की मांग है कि किसी की नौकरी न जाए, सबकी आजीविका सुरक्षित रहे। भाजपा सरकार की प्राथमिकता देखिए, भाजपा सरकार अब ऐसा कानून लाई है जिसमें कर्मचारियों को नौकरी से निकालना आसान हो गया है मोदी सरकार ने 44 महत्वपूर्ण श्रम कानूनों को रद्द करके श्रमिकों के अधिकारों को छीनने के अपने प्रयासों को तेज कर दिया है। कांग्रेस प्रदेश सचिव राजेन्द्र बंजारे ने कहा कि मौजूदा केंद्र की भाजपा सरकार ने श्रम कानूनों में परिवर्तन शुरू कर दिया है। जहा मालिकों को मनमानी ढंग से वेतन तय करने, ओवरटाइम काम लेने, छुट्टी देने, मुआवजा निर्धारित करने आदि की खुली छूट होगी। असंगठित क्षेत्र में बेहद ही कम वेतन पर मजदूर-वर्ग के बहुसंख्यक पुरुष और महिलाएं कमरतोड़ मेहनत करती हैं। पूर्व जनपद अध्यक्ष राजेंद्र बंजारे ने कहा कि श्रम कानूनों को व्यापक रूप से बदलाव यह हमें सौ साल पीछे ले जाने वाला कदम है। यह संवैधानिक ढाचे पर भी आघात है। भारत जैसे देश में ये और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जहा 93 फीसदी लोग असंगठित क्षेत्र में काम करते है इस कानून को खत्म करने का मतलब है बंधुआ मजदूरी,क्योंकि अब काम का अभाव और भुखमरी का फायदा उठाकर कोई भी न्यूनतम मजदूरी से कम में काम करा सकता है। उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय के अनुसार भी, कानूनन न्यूनतम मजदूरी से कम देना बंधुआ मजदूरी है। अगर कोई मजदूर उससे कम में काम करता है तो उसको मजबूरी या बेगार माना जाएगा। उद्योग विवाद अधिनियम पर आघात ठेकेदारी को बढ़ावा देगा और पक्की नौकरी के बजाय दिहाड़ी मजदूरों को लगाने का चलन बढ़ेगा। इससे किसी को भी काम पर लगाने और निकालने में पूंजीपतियों की मर्जी चलेगी। इसलिए श्री बंजारे ने माननीय राष्ट्पति जी से मांग करते हुए कहा कि श्रम कानून के बदलाव वाली काले कानून के नई नीति पर दस्तखत न करने का आग्रह करते हुए इसे पुनः संसद में भेजकर संशोधन कराने का अनुरोध किया है।
मजदूरों मेहनतकशों की हड्डियां निचोड़कर देशी, विदेशी पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने श्रम कानून में बदलाव लाये है मोदी-बंजारे

