किसान विरोधी कृषि बिल वापस ले केंद्र सरकार -कोमल हुपेण्डी,प्रदेश अध्यक्ष, आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़

24 सितंबर 2020
आम आदमी पार्टी
भानुप्रतापपुर

किसान विरोधी कृषि बिल वापस ले केंद्र सरकार -कोमल हुपेण्डी,प्रदेश अध्यक्ष, आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़

केंद्र सरकार ने असंवैधानिक तरीके से राज्यसभा में किसान विरोधी बिल पारित करवाया-देवलाल नरेटी,प्रदेश प्रवक्ता, आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़

केंद्र सरकार के किसान विरोधी बिल में किसानों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की कोई गारंटी नहीं-जिला अध्यक्ष,आम आदमी पार्टी काँकेर

केंद्र सरकार के किसान विरोधी बिल से उद्योगपतियों को होगा फायदा, किसानों को नहीं-लखेश्वर कोमरा,संगठन मंत्री,आम आदमी पार्टी भानुप्रतापपुर

देश में किसानों की आवाज , विपक्ष की आवाज को अनसुनी करके पूंजीपतियों के दवाब में केंद्र सरकार ने लोकसभा और राजयसभा में तीन किसान विरोधी बिल पास किया है । खासकर राज्यसभा में भाजपा के पास बहुमत नहीं होने के बावजूद असंवैधानिक तरीके से किसान विरोधी बिल पास किया गया, जिसको लेकर पूरे देश के किसानों में गुस्सा है । आम आदमी पार्टी किसानों के साथ खड़ी हैं , उनके लिए आज हम पूरे देश में विरोध दिवस मना रहे हैं । किसानों दुवारा कल 25 सितम्बर के भारत बंद के आहवान को आम आदमी पार्टी पूरा समर्थन देती है । मोदी सरकार ने तीन किसान विरोधी बिल पास किये जो इसप्रकार से है:-

  1. कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) बिल ।
  2. आवश्यक वस्तु (संशोधन) बिल।
  3. मूल्य आश्वासन तथा कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता बिल है ।केंद्र सरकार के द्वारा इन किसान विरोधी बिल के संबंध में जो बातें कही जा रही है वह किसानों को गुमराह करने वाली है। इससे किसानों को सिर्फ नुकसान होगा उनकी उपज पर बड़ी-बड़ी कंपनियों का कब्जा हो जाएगा । किसान अपने ही खेत पर मजदूर की तरह हो जाएंगे ।सरकार की मंशा किसानों को बड़ी-बड़ी कंपनियों के गुलाम बनाने का प्रतीत होता है ।
    आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कोमल हुपेण्डी ने बताया कि तीनों विधेयक और उनका असर निम्नानुसार है,
  4. कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) बिल के तहत किसान अपनी फसल को देश के किसी कोने में बेच सकते हैं, लेकिन आज भारत के अंदर 86% किसान एक ज़िले से दूसरे ज़िले में अपनी फसल नहीं बेच सकते हैं तो कैसे उम्मीद करें – एक राज्य का किसान दूसरे राज्य में अपनी फसल बेच पायेगा , पहले भी किसानों को मंडी के बाहर अपनी फसल बेचने के लिए कभी भी पाबंदी नहीं रही है । केंद्र सरकार के बिल में है- मंडी के अंदर किसानों के फसल की खरीद बिक्री पर व्यापारियों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से साथ मंडी टैक्स देना पड़ेगा , बाहर फसलों की खरीद- बिक्री पर व्यापारियों को कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा, मंडी के अंदर सरकार को दी जाने वाली टैक्स के कारण व्यापारी मंडी में आना बंद कर देंगे जिससे धीरे-धीरे मंडी बंद हो जाएगी और उनके स्थान पर कंपनी की मंडियां ले लेगी। जहां किसानों को अपने उत्पादन को औने पौने दामों पर बेचना पड़ेगा। सरकार को किसानों के हित में यदि फैसला लेना ही था तो एमएसपी का कानूनी अधिकार प्रदान करना था ,किंतु ऐसा नहीं किया गया जिस कारण इस विधेयक को किसान अपने को कंपनियों के गुलाम बनाने का विधेयक करार दे रहे हैं । दूसरा केंद्र सरकार सरकार को मंडी और बाहर भी फसलों की खरीद- बिक्री पर समान टैक्स की प्रक्रिया अपनानी चाहिए ।
  5. आवश्यक वस्तु (संशोधन) बिल इस विधेयक के जरिए पूंजीपतियों को कृषि उत्पादों को भंडारण करने का कानूनी अधिकार मिल जाएगा जिससे जमाखोरी और कालाबाजारी बढ़ेगी । वस्तुओं की कीमत पर सरकार का कंट्रोल नहीं रहेगा । देश में लगभग 80% से 85% छोटे- मोटे किसान है जिनके पास 2 हेक्टेयर से भी कम की कृषि भूमि है जिनके पास अपनी फसल का भंडारण करने की कोई व्यवस्था नहीं है ।इतनी कृषि भूमि का उत्पादन लेकर कोई किसान दूसरे राज्यों में फसल बेचने में भी सक्षम नहीं है। कुल मिलाकर अपनी फसल को औने- पौने दामों पर कंपनियों को बेचने पर मजबूर हो जाएंगे जिसे इन कंपनियों के द्वारा जमाखोरी कर अत्यधिक ऊंचे दामों पर बाजार में लाया जाएगा जिससे कंपनी राज स्थापित होने की आशंका बढ़ गई है ।

3 मूल्य आश्वासन तथा कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण)समझौता इस विधेयक के जरिए किसान के साथ कॉन्ट्रैक्ट कर कंपनियां जमींदार की तरह किसानों से फसल उत्पादन करवायेगी और मुनाफा कमायेंगी । अधिकांश किसान पढ़े- लिखे नहीं हैं , उनको ये कंपनियां कॉन्ट्रैक्ट के जाल में फंसाकर लगातार शोषण करेगी । बिहार में 2006 में मंडी सिस्टम खत्म हो गया है, लेकिन वहां के किसानों के हालात नहीं सुधरे । विदेशों में ये तथाकथित रिफार्म 1960 के दशक में आया, लेकिन अमेरिका, फ्रांस औए यूरोप के देशों में किसानों को सरकार को बड़े स्तर पर सब्सिडी देकर कृषि कार्य को कराना पड़ता है । इस प्रकार वर्तमान तीनों कृषि विधेयक किसानों के हित में नहीं है । यह किसानों को पुनः कंपनियों के गुलाम बनाने जैसा है जिसमें किसान अपने ही खेत पर मजदूर हो जाएंगे । बाजार पर सरकार का नियंत्रण खत्म हो जाएगी और कंपनी राज की स्थापना हो जाएगी । यही कारण है कि देश भर के किसान व किसान संगठन इन किसान विरोधी बिलों का विरोध कर रही है । आम आदमी पार्टी किसानों के हित में इस किसान विरोधी बिल को वापस लेने की केंद्र सरकार से अपील करती है और किसानों के लिए हम लड़ेंगे।इस अवसर पर मिथुन टेकाम, हेमन्त हिड़को, कृष्णगोपाल मिश्रा,रोहित कोमरा आदि उपस्थित थे।

अज़ीम खान
आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़
7000278886

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