भारत की जीडीपी सीधे माइनस में पुहंचाने वाले मोदी जी विश्व के पहले प्रधानमंत्री बने- बंजारे *(- 23.9 )बधाई नही दोगे ? – *जीडीपी में तेज गिरावट को लेकर कांग्रेस प्रदेश सचिव राजेन्द्र बंजारे ने केंद्र की भाजपा सरकार पर साधा निशाना।*
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव एवम पूर्व जनपद अध्यक्ष राजेंद्र पप्पू बंजारे ने जीडीपी में तेज गिरावट को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता राजेन्द्र बंजारे ने मांग की कि केंद्र स्पष्ट करे कि ”अर्थव्यवस्था को नष्ट करने का जिम्मेदार कौन है? भारत की जीडीपी सीधे माइनस में पुहंचाने वाले मोदी जी विश्व के पहले प्रधानमंत्री बने
(- 23.9 )
बधाई नही दोगे ? उन्होंने कहा कि ”अच्छे दिन का भोंपू बजाने वाली सरकार ने अर्थव्यवस्था की हालत पंचर कर दी है। न जीडीपी ग्रोथ है, न रुपये की मजबूती। रोजगार गायब हैं। अब तो साफ करो कि अर्थव्यवस्था को नष्ट कर देने की ये किसकी करतूत है?”
गौरतलब है कि शुक्रवार (30 अगस्त) को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार विनिर्माण क्षेत्र में गिरावट और कृषि उत्पादन की सुस्ती से जीडीपी वृद्धि में यह गिरावट देश की आर्थिक वृद्धि दर 2019-20 की अप्रैल-जून तिमाही में घटकर पांच फीसदी रह गयी। यह पिछले छह साल का न्यूनतम स्तर है। कांग्रेस प्रदेश सचिव राजेन्द्र बंजारे ने सरकार से कहा कि वह शेखी बघारने वाले दावे नहीं करे और इसके बजाय भारतीय अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए रूपरेखा के बारे में देश को बताये
जीडीपी में तेज गिरावट ”मोदी निर्मित आपदा” है और मांग की थी कि देश में एक वित्तीय आपातकाल घोषित किया जाए।खबरों की सुर्खियों का प्रबंधन करके सच्चाई को अब ज्यादा छुपाया नहीं जा सकता। पूर्व जनपद अध्यक्ष राजेंद्र बंजारे ने आगे कहा कि असंगठित क्षेत्र देश में 90 फ़ीसदी से ज्यादा आबादी को रोजगार देता है लेकिन मोदी सरकार ने रोजगार पैदा करने वाले क्षेत्र को जानबूझकर तबाह कर रही है।साथ ही देश में जो असंगठित क्षेत्र है उसमें 94% लोग काम करते है और 45% उत्पादन होता है अगर ऐसे में जहां 94% लोग काम करते है वहां पर उत्पादन कम हो रहा है और वहां रोजगार कम हो रहा है तो उससे डिमांड कम हो जाती है।
ये जो डिमांड कम हुई ये नोटबंदी के बाद से शुरू हुआ है फिर 8 महीने बाद जीएसटी का असर पड़ा फिर एनपीए का असर पड़ा यानी की तीन साल में तीन बड़े झटके लगे अर्थव्यवस्था को जिसकी वजह से बेरोजगारी बढ़ी है।
जैसा की सीएमआई के आकड़े दिखाते है कि 45 करोड़ लोग जो काम कर रहें वो घट के 41 करोड़ हो गए यानी की 4 करोड़ लोग रोजगार से बाहर हो गए जिनमें से ज्यादातर महिलाएं थी। साथ ही हमारे अर्थव्यवस्था में जो निवेश था वो 2012-13 में उचाई पर थी 37 %पर था वो 30% पर आ गया है। इसी वजह से अगर निवेश नहीं होगा तो अर्थव्यवस्था में ग्रोथ नहीं बढ़ती है।

