हाथियों की मौत पर सवाल खड़े करने वाले भाजपा अंदानी, अम्बानी को फायदा पहुचाने अब वन्य छेत्र में कोल् ब्लाक आंबटन की नीलामी कर केंद्र की भाजपा सरकार हाथियों पर और संकट पैदा करने कोशिश की जा रही है कांग्रेस प्रदेश सचिव राजेन्द्र बंजारे
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव राजेंद्र पप्पू बंजारे ने लेमरू प्रोजेक्ट छेत्र में केंद्र की भाजपा सरकार के द्वारा कोयला खादान अंदानी अंबानी को फायदा पहुचाने नीलामी की जा रही है जो भाजपा का कहि न कही वन्य जीव विरोधी, पर्यावरण विरोधी, आदिवासी संस्कृति विरोधी चेहरा उजागर हुआ है। एक तरफ भाजपा छत्तीसगढ़ इकाई के नेता हाथियों की मौत पर सवाल खड़ा कर रहे है वही दूसरी तरफ केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा वन्य प्राणियों के सरक्छण छेत्र में कोयना खादान आंबटन करने तैयारी किया जाना भाजपा के दोहरा चरित्र को दर्शाता है। छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में दस दिन में छह हाथियों की मौत से जहां वन्यप्रेमी स्तब्ध हैं, वहीं केंद्र सरकार ने लेमरू एलीफेंट प्रोजेक्ट क्षेत्र के चार कोल ब्लॉक को नीलामी के लिए प्रस्तावित कर हाथियों पर और संकट पैदा कर दिया है। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में हाथी प्रवास करते हैं। अगर हाथियों को उनके इलाके से एक बार फिर बेदखल किया जाता है तो हाथी-मानव द्वंद्व बढ़ना तय है।
पूर्व जनपद अध्यक्ष राजेंद्र बंजारे ने कहा कि ओडिशा में हाथियों के इलाके में खदानें शुरू होने से वे छत्तीसगढ़ व झारखंड की ओर पलायन को मजबूर हुए थे। करीब 13 साल पहले 2007 में हाथियों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार ने लेमरू एलीफेंट प्रोजेक्ट तैयार किया था। तब 450 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र इसके लिए चिह्नित किया गया था।
राज्य में कांग्रेस की सरकार बनते ही वर्ष 2019 के बजट में इस प्रोजेक्ट को न केवल शामिल किया गया, बल्कि क्षेत्रफल बढ़ाकर 1995.48 वर्ग किलोमीटर कर दिया। इस पर अभी सर्वे का काम चल ही रहा कि एक बार फिर व्यावसायिक उत्खनन की गाज गिर गई है। गुरुवार को केंद्र सरकार ने जो 41 कोल ब्लॉक की सूची नीलामी के लिए जारी कर दी। इनमें मोरगा- टू, मोरगा- साउथ, मदनपुर-नार्थ व श्यांग प्रस्तावित है।
श्यांग ब्लॉक पूरी तरह एलीफेंट प्रोजेक्ट एरिया में आ रहा है। अन्य तीन ब्लॉक भी प्रोजेक्ट के इर्द- गिर्द हैं। ओडिशा में खदानों के कारण हाथियों का पलायन झारखंड और छत्तीसगढ़ की ओर हुआ है। यह हाथी जिन इलाकों को अपना रहवास बना चुके हैं, अब वहां से उनके बेदखली का खतरा बढ़ गया है। पिछले छह साल के अंदर अकेले अंबिकापुर, रायगढ़ व कोरबा जिले में 56 हाथियों की मौत हो चुकी है। वहीं डेढ़ सौ लोगों की जान हाथी ले चुके हैं।
कोल ब्लॉक से हाथी ही नहीं बल्कि आदिवासियों का जनजीवन भी प्रभावित होगा। कोल ब्लॉक के लिए जंगल उजाड़े जाने से पर्यावरण पर भी असर पड़ेगा। जीवनदायिनी मिनीमाता बांगो बांध में पानी का भराव क्षेत्र भी कम होने का खतरा बढ़ जाएगा।

