मोदी सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि,पर कांग्रेस प्रदेश सचिव राजेन्द्र बंजारे ने कहा- किसानों को खैरात नहीं बल्कि अपना हक चाहिए।

मोदी सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि,पर कांग्रेस प्रदेश सचिव राजेन्द्र बंजारे ने कहा- किसानों को खैरात नहीं बल्कि अपना हक चाहिए।

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव एवं पूर्व जनपद अध्यक्ष राजेंद्र पप्पू बंजारे ने
धान समेत अन्य खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में केंद्र सरकार के द्वारा की गयी वृद्धि कहा कि किसान को खैरात नहीं बल्कि अपना हक चाहते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कोरोना वायरस महामारी के कारण किसानों के समक्ष आ रही गंभीर चुनौतियों को देख पाने में पूरी तरह से विफल रही है।
उन्होंने केंद्र सरकार से निर्णय की तत्काल समीक्षा करने और विस्तृत पैकेज पेश करने का अनुरोध किया। कांग्रेस प्रदेश सचिव राजेन्द्र बंजारे ने कहा कि कर्ज के बोझ में दबा किसान समुदाय इस अप्रत्याशित संकट के समय में केंद्र सरकार से मदद की उम्मीद कर रहा था, लेकिन बहुप्रतीक्षित राहत से वे एक बार फिर से वंचित रह गये हैं। इसके अलावा जिस तरह मोदी सरकार कुछ ही साल में किसानों की आमदनी दोगुनी करने के दावे कर रही है, वह भी हवा-हवाई है। सरकार ने इस झूठ को साबित करने का असफल प्रयास करते हुए ये भी दावा किया उसके शासन में किसानों की आमदनी दोगुनी से भी अधिक होने लगी है। इसके लिए मोदी ने छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के तीन किसानों से 20 जून 2018 को कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से बात कर देशवासियों को गुमराह करने का प्रयास किया। तीनों ने मनगढ़ंत कहानी बताई कि कैसे उनकी आमदनी दोगुनी से भी अधिक हो गई है, लेकिन बाद में पता चला कि वह सब फर्जी था।

कांग्रेस प्रदेश सचिव राजेन्द्र बंजारे ने आगे कहा कि देश के किसान मोदी की 2022 तक आय दोगुनी करने की घोषणा से चकित हैं कि आखिर उनकी मासिक या सालाना आय है ही कितनी जो 2022 में दोगुनी हो जाएगी। अभी तक किसानों की आय तय नहीं है, जिसकी किसान संगठन लगातार मांग कर रहे हैं। आम तौर पर सभी किसान संगठनों की इस मसले पर एक राय है कि न्यूनतम 22 हजार से लेकर 18 हजार रुपये महीना आय सुनिश्चित की जाए, जिसका नियमित भुगतान सरकारी खजाने से किया जाए।

श्री बंजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर धान का एमएसपी 2,900 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की है। केंद्र सरकार ने इसके बजाय धान का एमएसपी 53 रुपये बढ़ाकर महज 1,868 रुपये प्रति क्विंटल किया है। उन्होंने एमएसपी वृद्धि को अपर्याप्त बताते हुए कहा, ‘‘वे (किसान) जो चाहते हैं, वह खैरात नहीं बल्कि उनका हक है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अगुवाई वाली केंद्र सरकार लगातार उनकी जायज मांगों और जरूरतों को नजरअंदाज कर रही है।’’

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