'छत्तीसगढ़ी लोक कथाओं का अनुशीलन' विषय पर सर्व प्रथम शोध करने वाली, पिछले चार दशकों से लोक के विभिन्न पक्षों यथा लोकाभिरूची, लोक व्यवहार, लोक कथा एवं गीत आदि पर निरंतर शोध व लेखन एवं साहित्यिक आयोजनों में लगातार सक्रिय तथा छत्तीसगढ़ की संस्कृति एवं अस्मिता को विशिष्ट पहचान दिलाने हेतु निरंतर प्रयासरत डॉ श्रीमती मृणालिका ओझा को उनके लेखकीय योगदान विशेष रूप से उनके शोध ग्रंथ "लोक कथा में लोक और लालित्य" हेतु भिवानी (हरियाणा) की शिक्षा, साहित्य एवं जनसेवा को समर्पित एक अग्रणी संस्था 'गुगनराम एजुकेशनल एण्ड सोशल वैलफेयर सोसाइटी' के द्वारा 'श्रीमती प्यारी देवी घासीराम सिहाग साहित्य सम्मान' से सम्मानित किया गया।
श्री राजेन्द्र ओझा तीन दशक से भी ज्यादा समय से साहित्यिक, सांस्कृतिक क्षेत्र में लगातार सक्रिय है। उनकी लघुकथाएं एवं कविताएं अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है साथ ही साथ आकाशवाणी एवं दूरदर्शन से भी उनका प्रसारण हुआ है।
वर्तमान में चरामेति फाउंडेशन के महासचिव है एवं सामाजिक सेवा के विभिन्न क्षेत्रों में संलग्न रहते हुए विभिन्न विषयों पर साहित्यिक गोष्ठियां भी आयोजित कर रहे हैं। श्री राजेन्द्र ओझा के समग्र योगदान के आधार पर उन्हें ‘श्रीमती सरस्वती देवी गिरधारीलाल सिहाग साहित्य सम्मान’ से सम्मानित किया गया।

