रमजान माह मे रोजा बड़ों के साथ-साथ मासूम बच्चों ने भी रखा। बच्चों की जिंदगी का भी यह पहला रोजा है। तपती धूप की परवाह किए बिना नन्हे मुन्ने बच्चों ने रोजा रखा। अल्लाह और उसके रसूल की रजा हासिल करने के लिए भूख और प्यास की शिद्दत बर्दाश्त कर बच्चों ने कोरोना के खात्मे के लिए भी दुआएं मांगी। शुक्रवार को चांद दिखने के बाद मुकद्दस महीने की शुरूआत हुई। पहले दिन ही भीषण गर्मी ने रोजेदारों का इम्तिहान लिया।
वही डी डी नगर के दो भाइयों मोहम्मद अयान अहमद और मोहम्मद अयाज़ अहमद ने अपना पहला रोज़ा रखा इनके पिता मोहम्मद इरशाद अहमद और माँ फ़िरदौस अहमद ने अपने बच्चों को दुआओं से नवाजा। परिवार के बड़े लोगों ने भी हौसला अफजाई की। शाम को इफ्तार के वक्त बच्चों के चेहरे पर खुशी की झलक रही। बच्चों ने रोजा खोलकर कोरोना के खात्मे के लिए अल्लाह से दुआएं कीं। इसके अलावा शहर में ऐसे अनेक बच्चे हैं, जिन्होंने जिंदगी का पहला रोजा रखा और दिनभर इबादत भी की। घर में ही बच्चे नमाज पढ़ने के साथ ही कुरआन की तिलावत भी करते रहे। कोरोना संक्रमण व लॉकडाउन के चलते लोगों ने घरों पर ही पांच वक्त की नमाज अदा की। साथ ही रोजेदारों ने अपने-अपने परिवारों के साथ ही इफ्तार किया।

