फर्रुखाबाद: भीड़ ने सिरफिरे की पत्नी को मार डाला

हिमांशु तिवारी, फर्रुखाबाद
के फर्रुखाबाद जिले में 11 घंटे तक चले ऑपरेशन के साथ आखिरकार 21 बच्चों को बंधक बनाने वाले सिरफिरे को पुलिस ने ढेर कर दिया। इस घटना में सुभाष की सनक की सजा उसकी पत्नी रूबी को भी भुगतनी पड़ी। नाराज ग्रामीणों ने सुभाष के घर पर पत्थरबाजी के साथ उसकी पत्नी रूबी की भी पिटाई की थी, जिसकी वजह से वह बुरी तरह से जख्मी हो गई थी। बाद में रूबी ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
एनबीटी ऑनलाइन ने इस ऑपरेशन के कई अहम पहलुओं को जानने के लिए फर्रुखाबाद एसपी डॉ. अनिल मिश्रा से बात की।

एसपी डॉ. अनिल मिश्रा ने बताया, ‘रात तकरीबन 1 बजे घर के अंदर से चीखने-चिल्लाने की आवाजें आ रही थीं। हमें इस बात का डर था कि बच्चों के साथ कुछ गलत न हो। सुभाष अपने घर के दरवाजे में बने छेद से फायरिंग कर रहा था। हमने टीम के साथ सुभाष के घर का पीछे वाला दरवाजा तोड़ दिया। हम जैसे ही पहुंचे तो सुभाष ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। उसने पुलिस टीम पर बम भी फेंका था। हमारा नेतृत्व आईजी रेंज मोहित अग्रवाल कर रहे थे। साथ में स्वाट प्रभारी दिनेश गौतम और उनकी टीम, एएसपी त्रिभुवन सिंह और कई अन्य पुलिसकर्मी थे।’

‘…जब मकान का पिछला दरवाजा तोड़ घुसी पुलिस’
पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘सुभाष और उसकी पत्नी रूबी पुलिस को देख सामने वाला गेट खोलकर बाहर भागने लगे। घर के सामने पुलिस और ग्रामीण खड़े थे। गांव वालों ने सुभाष और रूबी को पकड़कर पीटना शुरू कर दिया। पुलिस ने दोनों को भीड़ के चंगुल से छुड़वाया। सुभाष इस दौरान फिर से घर की तरफ भागा और उसने अंदर मौजूद पुलिस टीम पर फायर झोंक दिया। क्रॉस फायरिंग में सुभाष की मौत हो गई। उधर, सुभाष की पत्नी रूबी घर के बाहर ही रह गई थी। भीड़ ने उसकी पिटाई की, जिसकी वजह से वह बुरी तरह से जख्मी हो गई थी। आननफानन उसे ऐम्बुलेंस से अस्पताल भेजा गया, जहां उसकी मौत हो गई।’

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‘मौसा की हत्या में काट चुका था जेल’
एएसपी त्रिभुवन सिंह कहते हैं, ‘सुभाष पहले भी सजायाफ्ता रह चुका है। उसने वर्ष 2001 में अपने मौसा की हत्या कर दी थी, जिसके बाद उसे कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। वह 10 वर्षों तक जेल में रहा। फिर जमानत पर बाहर आया था।’

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Source: National

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