UP: राम मंदिर ट्रस्‍ट पर VHP की अहम बैठक

वीएन दास, अयोध्या
यूपी के प्रयागराज में विश्व हिंदू परिषद के मार्गदर्शक मंडल की एक अहम बैठक शुरू हो गई है। माघ मेला में पहली बार हो रही वीएचपी मार्गदर्शक मंडल की इस बैठक में राम मंदिर ट्रस्ट के स्वरूप, मंदिर निर्माण की कार्ययोजना पर मंथन समेत कई अन्य मुद्दों पर चर्चा होनी है। खास बात यह कि अब तक कुंभ के मौकों पर ही होने वाली ऐसी बैठकों को माघ मेले में पहली बार आयोजित किया गया है। यह बैठक उस वक्त हो रही है, जबकि केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने की योजना पर काम करना शुरू किया है।

वीएचपी के पदाधिकारियों का कहना है कि माघ मेला के अवसर पर प्रयागराज में सोमवार को होने वाली केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में वीएचपी के राम मंदिर मॉडल पर ही मंदिर का निर्माण करवाने, अयोध्या की न्यास कार्यशाला में तराशे गए पत्थरों का उपयोग करने का मुद्दा प्रमुख होगा। विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा ने बताया कि संतों की राय है कि राम मंदिर के ट्रस्ट का ऐलान जल्द किया जाए। जिससे राम मंदिर के निर्माण का काम राम नवमी से शुरू किया जा सके।

‘वीएचपी के मॉडल पर ही हो मंदिर निर्माण’
उन्होंने बताया कि राम जन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने जोर देकर कहा है कि मंदिर मॉडल के लिए लाखों राम भक्तों ने शिला पूजन किया और शिलाओंं का अयोध्या पहुंचाया। उनकी भावनाओं को मंदिर से जोड़ने के लिए प्रस्तावित मॉडल में बिना किसी बदलाव के राम मंदिर का निर्माण किया जाए। इसके साथ ही इसके परिसर का व्यापक विस्तार भी किया जाए, जिससे यह विश्व का अद्भुत मंदिर बन सके। केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल में करीब 200 प्रमुख संत एवं वीएचपी पदाधिकारी शामिल है। इसकी बैठक 9 नवंबर 2019 के बाद अब प्रयागराज के माघ मेला में हो रही है।

संत और वीएचपी पदाधिकारी पहुंचे प्रयागराज
वीएचपी की इस बैठक में शामिल होने के लिए अयोध्या से संतोंं का विशाल समूह प्रयागराज पहुंचा है। इसके अलावा वीएचपी के वरिष्ठ नेता भी प्रयागराज पहुंचे हैं। शरद शर्मा ने बताया कि राम नवमी से मंदिर निर्माण की मंशा को जताने के लिए 28 मार्च से ही देश भर के उन गांवो में राम महोत्सव का आयोजन होगा, जहां से रामशिलाओं का पूजन हुआ था। ऐसे गांवों की संख्या ढाई लाख के आस-पास है। राम महोत्सव में भजन हनुमान चालीसा और सुंदर कांड का पाठ जैसे अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे। इस कार्यक्रम को अंतिम रूप सोमवार को होने वाले केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक और संत सम्मेलन में ही दिया जाएगा।

Source: National

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