ऑस्ट्रेलिया आग: 80 हजार कोआला जलकर मरे

कैनबरा
सिडनी यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लाइफ ऐंड एनवायरनमेंट साइंसेज में टेरेस्ट्रियल इकोलॉजी के प्रफेसर और ऑस्ट्रेलियन एकेडमी ऑफ साइंस के फेलो क्रिस्टोफर डिकमैन का दावा है कि ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग में तकरीबन अरबों प्रजातियां जलकर नष्ट हो चुकी हैं। हमारी सहयोगी वेबसाइट Times Evoke से बातचीत में डिकमैन ने इस बात पर चिंता जताई कि क्लाइमेट चेंज के चलते इंसानों पर जो प्रभाव पड़ रहा है उसका असर कहीं ज्यादा घातक है।

80, 000 कोआला आग में जलकर खाक
डिकमैन ने का कि मैं अब भी इस पर काम कर रहा हूं और मेरा मानना है कि सैकड़ों अरब प्रजातियों को नुकसान पहुंचा है। इसमें शक की गुंजाइश नहीं है। न्यू साउथ वेल्स से 80, 000 कोआला आग में जलकर खाक हो गए। ये आंकड़े और भी बढ़ सकते हैं। पौधों की लंबी रेंज है, जैसे ऑर्चिड की खास प्रजातियां हैं, जो छोटे-छोटे इलाकों में ही केवल पाए जाते हैं, आग से खत्म हो गए।

इस जैव विविधता के नुकसान का इंसान पर क्या असर होगा?
कई तरीके से असर होगा। ऐसी प्रजातियां खत्म हुई हैं, जो केवल ऑस्ट्रेलिया में ही पाई जाती थीं। इनके खत्म होने का मतलब ये है कि ये ग्लोबल नुकसान है क्योंकि ये प्रजातियां दुनिया में और कहीं पाई ही नहीं जाती थी। प्रकृति में इनका योगदान था। इकोसिस्टम पर इसका बुरा असर पड़ेगा।

इस बर्बादी को क्लाइमेट चेंज से कैसे जोड़ेंगे?
हम पिछले कुछ समय से ये आकलन कर रहे थे कि क्लाइमेट चेंज की वजह से दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में गर्मी बढ़ती जा रही है और नमी खत्म हो रही है। तमाम जगहों पर अत्यधिक ठंड या अत्यधिक गर्म मौसम के साथ सूखा और अचानक बारिश जैसे हालात भी देखने में आए हैं। 2019 में ऑस्ट्रेलिया में सबसे ज्यादा गर्मी और सूखा मौसम रिकॉर्ड की गई। 2018 में सूखा भी पड़ा, जो 2019 में भी कायम रहा। इस वजह से जंगलों में आग आसानी से लगी। इन सबकी भविष्यवाणी 2008 में ही कर दी गई थी। उसी समय ये अनुमान लगाया गया था कि 2020 के आसपास जंगलों में भीषण आग लग सकती है।

क्लाइमेट चेंज चेतावनी को कितनी तवज्जो दी गई?
बहुत कम। तथ्य तो ये है कि पहले देश में कार्बन टैक्स लगता था, लेकिन नई सरकार ने उसे भी हटा दिया। ऑस्ट्रेलिया में उत्सर्जन का स्तर लगातार बढ़ता रहा।

Source: International

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