इमरान ने माना, कश्मीर पर नहीं मिल रहा भाव

बॉन (जर्मनी)
कश्मीर मुद्दे पर वैश्विक मंचों पर भारत से मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को स्वीकारा कि इस मुद्दे पर उन्हें वैश्विक समुदाय का साथ नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि इस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया बेहद धीमी रही है। उल्लेखनीय है कि आर्टिकल 370 से जुड़े फैसले के बाद पाकिस्तान भारत के आंतरिक मामले में गैरजरूरी हस्तक्षेप की कोशिश कर रहा है और उसने इस मुद्दे को वैश्विक मंचों पर भी उठाया, जहां से उसे कोई सफलता हासिल नहीं हुई।

इमरान ने कहा, ‘दुर्भाग्यवश, पश्चिमी देशों के लिए व्यावसायिक हित ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। भारत बड़ा बाजार है और कश्मीर में 80 लाख लोगों के साथ क्या हो रहा है, उस पर धीमी प्रतिक्रिया की यही वजह है।’ जर्मनी के एक चैनल को दिए इंटरव्यू में इमरान ने यहां तक कह डाला कि आरएसएस की विचारधारा के कारण भारत उससे बातचीत नहीं करना चाहता। बता दें कि भारत ने दो-टूक शब्दों में कहा है कि आतंकवाद और वार्ता साथ-साथ नहीं हो सकती। जब तक पाकिस्तान अपने देश में प्रायोजित आतंकवाद पर लगाम नहीं लगाता उससे कोई बातचीत नहीं हो सकती।

आरएसएस की तुलना नाजी से
आर्टिकल 370 से जुड़े फैसले के बाद भारत और पाकिस्तान में बढ़े तनाव के बार में पूछने पर इमरान ने आरएसएस पर हमला बोलते हुए कहा, ‘मैं पहला नेता था जिसने दुनिया को चेताया कि भारत में क्या हो रहा है। भारत में कट्टरपंथी विचारधारा-हिंदुत्व का नियंत्रण स्थापित हो रहा है। यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा है।’ इमरान ने कहा, ‘राजनीतिक संगठन आरएसएस का गठन 1925 में हुआ था जो कि जर्मनी के नाजियों से प्रेरित है और उसके संस्थापक नस्लभेद में यकीन रखते थे वैसे जैसे कि नाजी विचारधारा अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत पर बनी थी, आरएसएस की विचारधारा मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों से नफरत पर आधारित है।’

भारत से वार्ता के प्रयास का दावा
दुनियाभर को पता है कि भारत पाक द्वारा फैलाए आतंकवाद के कारण उससे वार्ता क्यों नहीं कर रहा है, लेकिन झूठे दावे करते हुए इमरान ने कहा
, ‘पीएम बनने के बाद, मैंने भारत सरकार और पीएम मोदी से बातचीत के प्रयास किए। बतौर पीएम मेरे पहले भाषण में मैंने कहा कि अगर भारत एक कदम आगे बढ़ता है तो हम दो कदम आगे बढ़ेंगे और मतभेद को दूर करेंगे। लेकिन मुझे बहुत जल्दी पता चल गया कि आरएसएस की विचारधारा के कारण भारत ने मुझे जवाब नहीं दिया।’

इमरान ने ये बातें ऐसे समय में कही हैं जब चीन और पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कश्मीर का मुद्दा उठाने के लिए अनौपचारिक बैठक की है। वहीं, भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने गुरुवार को स्पष्ट कर दिया था कि यूएनएससी में बहुमत का विश्वास है कि कश्मीर मुद्दे पर चर्चा के लिए यह सही मंच नहीं है।

रवीश कुमार ने कहा, ‘पाकिस्तान की तरफ से यूएनएससी के एक सदस्य के साथ मिलकर इस मंच का गलत इस्तेमाल करने की कोशिश की गई है। यूएनएससी में बहुमत का मानना है कि यह इस तरह के मुद्दे पर चर्चा के लिए उचित मंच नहीं है और इसपर भारत और पाकिस्तान में द्विपक्षीय वार्ता होनी चाहिए।’

Source: International

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