कांगो में चेचक का कहर, 6000 लोगों की मौत

कांगो डेमोक्रैटिक रिपब्लिक कांगो में अब तक चेचक की वजह से हो चुकी है। मेल ऑनलाइन में प्रकाशित खबर के अनुसार, 2019 में चेचक महामारी फैलने के कारण हुई मौत में अब तक मौत का आंकड़ा से होनेवाली मौत से लगभग तीन गुना अधिक है। अभी तक देश के एक चौथाई से अधिक लोगों में चेचक का संक्रमण पाया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे दुनिया के सबसे बुरे प्रकोप में से एक बताया है।

इबोला वायरस की तरह नहीं बटोर रहा सुर्खियां
चेचक की महामारी के लगातार फैलने के बाद भी अभी तक अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का इस पर खास ध्यान नहीं दिया गया। इबोला वायरस फैलने की खबरों ने जितनी सुर्खी बटोरी थी उतनी सुर्खियां चेचक महामारी के कारण होनेवाली बीमारी की नहीं हो रही है। 2018 में इबोला वायरस संक्रमण फैलने की पहली रिपोर्ट के बाद 2,231 लोगों के मौत का रेकॉर्ड दर्ज किया गया था।

साधनों के अभाव में भयावह हो रही स्थिति
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि फंडिंग के अभाव में और पर्याप्त स्वास्थ्य उपकरण नहीं होने के कारण संक्रमण बुरी तरह से फैल रहा है। कांगों में स्वास्थ्य सुविधाओं का पहले ही अभाव है और ऐसे में बिना अंतरराष्ट्रीय सहयोग के चेचक की इस महामारी से निपटना काफी मुश्किल साबित हो रहा है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि संगठन की ओर से कांगो को 26.2 अमेरिकी डॉलर की सहायता मुहैया कराई गई है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।

बच्चों में संक्रमण रोकना बड़ी चुनौती
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि करीब 30 मिलियन यूरो (39.3 मिलियन डॉलर) रकम चेचक संक्रमण को रोकने के लिए खर्च किए जाएंगे। छह साल से 14 साल की उम्र के बच्चों के बीच संक्रमण न फैले इसके लिए कम से कम 6 महीने के ऐक्शन प्लान की जरूरत है। चेचक को रोकने के लिए खास तरह की वैक्सीन उपलब्ध है, लेकिन कांगो में 2019 की शुरुआत से अब तक कुल 310,000 केस दर्ज किए गए हैं।

Source: International

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