संन्यास के बाद फिल्मों में ऐक्टिंग करेंगे इरफान पठान

सौमित्रा दास, इंदौर
टीम इंडिया के पूर्व ऑलराउंडर क्रिकेटर इरफान पठान ने शनिवार को इस खेल से अपनी रिटायरमेंट का ऐलान कर दिया। पठान के इस ऐलान के बाद सोशल मीडिया पर उनका नाम खूब ट्रेंड करने लगा और फैन्स टीम इंडिया में दिए उनके यादगार लम्हो को याद करने लगे। अपने संन्यास के पठान के हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बात की। इस बातचीत में उन्होंने टीम इंडिया में अपने शानदार क्षण, अपने पसंदीदा कप्तान, भविष्य की योजनाएं आदि के बारे में बताया। पेश हैं इस चर्चा के खास अंश…

कब तय किया कि अब खेल को अलविदा कहने का वक्त आ गया है?2016 में, जब मैं सैयद मुश्ताक अली ट्रोफी में बैट से शानदार योगदान दिया, तब मुझे मालूम चला कि सिलेक्टर मेरी बोलिंग से खुश नहीं हैं, तो मैं समझ गया था कि अब भारतीय टीम में मेरा कमबैक संभव नहीं है।

इस खेल ने मुझे बहुत दिया, मुझे भी इसे कुछ लौटाना हैजल्दी ही मुझे कई अन्य लीग से खेलने के ऑफर मिलने लगे थे लेकिन मैंने जम्मू और कश्मीर की टीम में बतौर मेंटर-खिलाड़ी का रोल चुनना पसंद किया। मैं सोचता हूं कि इस खेल ने मुझे बहुत कुछ दिया है तो मुझे भी इसे कुछ लौटाना चाहिए। कुछ महीने पहले मैंने अपने परिवार को बता दिया था कि मैं अब खेल से अलविदा बोलना चाह रहा हूं और उन्होंने मुझे सपॉर्ट किया।

अब, आगे क्या प्लान हैं?इस समय मेरे दोनों हाथ भरे हुए हैं। कॉमेंटेटर के रूप में मेरा कॉन्ट्रैक्ट दो साल के लिए बढ़ चुका है। मैं जम्मू और कश्मीर की टीम को मेंटर कर रहा हूं और एक तमिल फिल्म में भी काम कर रहा हूं। मैं रिटायर हो चुका हूं लेकिन क्रिकेट के साथ मेरा जुड़ाव हमेशा बना रहेगा और मैं जिस भी तरह से युवाओं को सपॉर्ट कर सकता हूं उसे मैं जारी रखूंगा। अभी मैं यह नहीं कह सकता कि मैं अन्य लीग में जाकर खेलूंगा या नहीं।

पीछे मुड़कर देखें तो टीम इंडिया में आपके कौन से तीन वे क्षण हैं, जो हमेशा याद रहेंगे?टीम इंडिया के पहली बार कप जीतना, 2007 वर्ल्ड टी20 के फाइनल में मैन ऑफ द मैच बनना और पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच (2006 में) के पहले ही ओवर में हैटट्रिक लेना।

आपके पसंदीदा कप्तान कौन थे? और जब पीछे मुड़कर देखते हैं तो कोई दुख या पछतावा है?
दादा (सौरभ गांगुली) सबसे ज्यादा प्रेरित वाले कप्तानों में से थे, उन्होंने ऐसे वक्त में टीम इंडिया की कमान संभाली जब भारतीय क्रिकेट संकट में फंसी हुई थी, तब उन्होंने हमें कई यादगार जीत दिलाईं। मैंने राहुल द्रविड़ की कप्तानी में भी खूब खेला और यहां मैंने बैट से भी बेहतर करने का काम किया। मुझे अनिल कुंबले के अंडर खेलकर भी खूब मजा आया और काश ऐसा होता कि वह टीम इंडिया की कप्तानी और भी ज्यादा साल तक करते, जितनी उन्होंने की।

मुझे खाली एक ही पछतावा है- कि 27 साल की उम्र में जब ज्यादातर खिलाड़ी अपने इंटरनैशनल करियर की शुरुआत करते हैं या रफ्तार पकड़ते हैं तब (2012 में) मैंने भारत के लिए अपना अंतिम मैच खेला। मैं पहले भी कह चुका हूं कि मैंने वह सब अचीव किया, जो बहुत से लोग अपने करियर में अचीव नहीं कर पाते हैं, जो संतोषजनक है।

कभी क्रिकेट खेलने के लिए पुराने जूते खरीदकर पहनने पड़ते थे और बाद में एक बड़े जूते बनाने वाले ब्रैंड का ब्रैंड ऐंबसडर बनना, फैन्स से खूब सारा प्यार मिलना, इस सबके लिए मैं बहुत आभारी हूं और आज भी साल 2020 में भी जब मेरे फैन मुझे कमबैक के लिए प्रेरित करते हैं, तो मैं खुद को बहुत खुशनसीब मानता हूं। इससे ज्यादा मैं आखिर क्या मांग सकता हूं।

जब आपका प्राइम समय था, तब आपको देश का अगला कपिल देव कहा जा रहा था। क्या इससे आप दबाव में आ गए? बिल्कुल भी नहीं, यह बहुत शानदार वाहवाही थी। मुझे इस तुलना से कभी भी किसी भी तरह का दबाव महसूस नहीं हुआ, और मैं इसे बहुत बड़े सम्मान के तौर पर देखता हूं।

Source: Sports

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