शियाओं के जेम्स बॉन्ड क्यों कहे जाते थे कासिम

वॉशिंगटन
इराक में ईरान के मेजर जनरल के मारे जाने के बाद तनाव बेहद बढ़ चुका है। लंबे समय से प्रतिद्वंद्वी ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच चुका है। ईरान में सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्लाह खामेनेई के बाद कासिम को दूसरे नंबर का सबसे ताकतवर शख्स माना जाता था।
आइए जानते हैं ईरान के लिए कितने अहम थे कासिम सुलेमानी और कैसे हुए थे इतने ताकतवर…

सीरिया, यमन, लेबनान और इराक में था दबदबा
कासिम सुलेमानी ईरान की सेना इस्लामिक रिवॉलूशनरी गार्ड की विदेशी विंग कद्स फोर्स के जनरल थे। इस यूनिट ने 1998 में अपने काम की शुरुआत की थी, जिसका दखल सीरिया, लेबनान, इराक और यमन में था। इन चारों ही देशों में कासिम सुलेमानी का भी अच्छा खासा दबदबा था।

1980 से ही ईरानी सेना में थे ताकतवर
1957 में पूर्वी ईरान के एक गरीब परिवार में जन्मे कासिम काफी कम उम्र में ही सेना से जुड़ गए थे। 1980 के ईरान-इराक युद्ध में सीमा की रक्षा को लेकर वह काफी चर्चित रहे। इस युद्ध में अमेरिका ने इराक का साथ दिया था।

शियाओं के जेम्स बॉन्ड कहे जाते थे सुलेमानी मध्य पूर्व के शियाओं के बीच वह काफी चर्चित थे। ईरान के बाहर मध्य पूर्व के देशों में अभियान चलाने में वह काफी अहम थे। एक पूर्व सीआईए एनालिस्ट ने उन्हें मध्य पूर्व के शियाओं के बीच जेम्स बॉन्ड और लेडी गागा जैसा पॉप्युलर बताया था। 2019 में ही सुलेमानी को ईरान का सर्वोच्च सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ जुल्फिकार’ दिया गया था।

पहले भी आई थीं कासिम की मौत की खबरें
अमेरिका की ओर से कई बार प्रतिबंध का सामना करने वाले कासिम सुलेमानी की मौत की पहले भी कई बार खबरें आई थीं। 2006 में ईरान में एक प्लेन क्रैश, 2012 में दमिश्क में हुई बमबारी और अलेप्पो में 2015 में हुए अटैक में भी उनकी मौत की अफवाह फैली थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं था।

कासिम को ‘जिंदा शहीद’ कहते थे खामेनेई
ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्लाह खामेनेई कासिम सलमानी को ‘जिंदा शहीद’ कहते थे। इसकी वजह यह थी कि वह जानते थे कि कासिम सुलेमानी दुश्मन के टारगेट पर हैं। सुलेमानी की मौत के बाद खामेनेई ने कहा कि भले ही वह चले गए, लेकिन उनका मिशन और रास्ता खत्म नहीं होगा।

ट्रंप को दी थी धमकी, हम खत्म करेंगे जंग
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के एक ट्वीट के जवाब में कासिम ने 2018 में लिखा था, ‘हम आपके पास हैं, इतना जितना आप सोच भी नहीं सकते। आओ, हम तैयार हैं। यदि आप जंग शुरू करेंगे तो हम खत्म करेंगे। आप जानते हैं कि यह जंग आपकी ताकत पूरी तरह खत्म कर देगी।’

40 साल पुराना है ईरान-अमेरिका में तनाव
अमेरिका ने 1980 में ईरान और इराक के बीच जंग में इराक का साथ दिया था। उसके बाद से ही दोनों देशों के बीच रिश्ते कभी सहज नहीं रहे। 1984 में अमेरिका ने ईरान को आतंकवाद बढ़ाने वाला देश करार दिया था और कई प्रतिबंध लगा दिए। तब से आज तक ईरान और अमेरिका के रिश्ते कभी सहज नहीं रहे।

Source: International

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *