बाबरी: जल्द आ सकता है CBI कोर्ट का फैसला

राघव ओहरी, नई दिल्ली
का मुकदमा महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच चुका है। इस केस के मुख्य जांच अधिकारी से लखनऊ स्थित सीबीआई कोर्ट में पूछताछ चल रही है। कोर्ट ने सीबीआई के पूर्व संयुक्त निदेशक एम. नारायणन से पूछताछ शुरू कर दी है जिन्होंने जांच दल की अगुवाई की। उनके बयान पर बचाव पक्ष के वकील भी सवाल करेंगे और उनसे जवाब मांगेंगे।

कोर्ट में चल रही गतिविधियों से वाकिफ लोगों ने हमारे सहयोगी अखबार इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि नारायणन ने अपने बयान में अभियोजन के आरोपों का समर्थन किया है। उन्होंने बताया कि नारायणन ने साक्ष्य प्रस्तुत किए साक्ष्यों और रेकॉर्ड्स की पुष्टि की। नारायण से पूछताछ खत्म होने के बाद सहायक जांच अधिकारियों से भी पूछताछ होगी जिन्होंने गवाहों के बयान दर्ज किए थे। जांच के बाद साक्ष्य समेट लिए जाएंगे।

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ईटी ने 19 दिसंबर को सबसे पहले खबर दी थी कि उचित मशीन नहीं होने के कारण पुराने विडियो कैसेट्स नहीं चलाए जा सके जिनसे महत्वपूर्ण सबूत मिल सकते थे। दो गवाहों के बयान नहीं लिए जा सके क्योंकि सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट में 15एमएम और 35एमएम टेप्स चलाने के लायक प्रॉजेक्टर उपलब्ध नहीं है। ये दोनों गवाह दूरदर्शन के फिल्म डिविजन के कर्मचारी हैं जिन्होंने 6 दिसंबर, 1992 को हुए बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना का विडियो बनाया था।

ने 19 अप्रैल, 2017 को सीबीआई स्पेशल कोर्ट में रोजाना आधार पर सुनवाई का आदेश दिया था और कहा था कि सुनवाई के लिए दो साल की समयसीमा सुनिश्चित की थी। सर्वोच्च न्यायाल ने बाबरी मस्जिद विध्वंस को ‘अपराध’ बताते हुए कहा था कि इस घटना ने संविधान के सामाजित तानेबाने को हिला दिया। उसने मामले में वीवीआईपी आरोपियों के खिलाफ दोबारा आपराधिक साजिश रचने के आरोप गठित करने की सीबीआई की याचिका मंजूर कर ली थी।

उच्चतम न्यायालय ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता एलके आडवाणी और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ साजिश रचने का आरोप खारिज करने के इलहाबाद हाई कोर्ट के 12 फरवरी, 2001 के फैसले को दोषपूर्ण करार दिया। उसने 19 जुलाई, 2018 को स्पेशल सीबीआई जज का कार्यकाल मुकदमे की सुनवाई खत्म कर फैसला देने तक बढ़ा दिया जिनका कार्यकाल 30 सितंबर, 2018 को ही खत्म हो रहा था।

Source: National

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