ड्रग्स की लत से आध्यात्म, जानें बाबा की कहानी

बॉस्टन
बाबा रामदास 1960 के दशक में टिमोथी लेअरी के साथ चर्चित हुए थे। हार्वर्ड के दोनों शिक्षाविद मनोवैज्ञानिक दवाओं को मानसिक शक्ति बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए साथ काम कर रहे थे। हालांकि, भारत भ्रमण के बाद बाबा रामदास की प्रेरणा बदली और उन्होंने आध्यात्मिक मार्ग पर चलना शुरू कर दिया। अपनी किताब बी हेयर नाउ में उन्होंने इसका विस्तार से उल्लेख किया है। रविवार को 88 साल की उम्र में उन्होंने आखिरी सांस ली।

यहूदी परिवार में जन्म, भारत की आध्यात्मिकता से प्रभावित
बाबा रामदास को भारतीय आध्यात्मिक मूल्यों को पश्चिमी देशों में प्रचारित करने के लिए जाना जाता है। अमेरिका के एक यहूदी परिवार में जन्म लेनेवाले रिचर्ड अल्पर्ट बाद में बाबा रामदास बन गए। अपने आरंभिक जीवन में वह खुद को नास्तिक मानते थे। स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने के बाद वह 60 के शुरुआती दशक में मनोविज्ञान के प्रफेसर बन गए।

नशे के आदि रामदास की जिंदगी भारत में बदली
बाबा रामदास का गांजा से पहला सामना 1955 में हुआ। इसके बाद उन्होंने काफी ज्यादा नशा करना शुरू कर दिया। अपने सहयोगी के साथ मिलकर उन्होंने एलएसडी ड्रग्स का प्रयोग इलाज के लिए भी करना शुरू कर दिया। हालांकि, उनके प्रयोग के ऐसे तरीके हार्वर्ड यूनिवर्सिटी प्रशासन को कुछ खास पसंद नहीं आया और उन्हें हार्वर्ड से निकाल दिया गया। बाद में वह भारत आए और यहां से उनकी आध्यात्मिकता शुरू हुई और उन्हें उनके आध्यात्मिक गुरु ने नया नाम रामदास दिया।

Source: International

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