पोप ने ईसाई धर्म में कट्टरता की निंदा की

वेटिकन सिटी
ने शनिवार को कहा कि ईसाई धर्म के अनुपालन में कट्टरता से दुनिया में नफरत और गलतफहमी की भयंकर स्थिति पैदा हो रही है जहां ईसाइयत लगातार अप्रासंगिक होता जा रहा है। फ्रांसिस ने होली सी (रोमन कैथोलिक क्षेत्र के संप्रभु प्रशासनिक क्षेत्र) में कार्यरत कार्डिनल, बिशप और पादरियों के प्रति अपने वार्षिक क्रिसमस बधाई के दौरान वेटिकन के नौकरशाहों से बदलाव को आत्मसात करने का आह्वान किया।

ऐसा लग रहा है कि फ्रांसिस का यह संदेश रूढ़िवादी और समुदाय के लिए है । उनमें वेटिकन कुरिया भी हैं, जिन्होंने उनके प्रगतिशील सोच वाले पोपतंत्र के खिलाफ विरोध के स्वर मुखर किए हैं। इन लोगों की आलोचना इस साल भर के दौरान बढ़ी है जब वेटिकन कई वित्तीय और यौन उत्पीड़न के स्कैंडलों से घिर गया लेकिन फिर भी ये मामले पूरी तरह सामने नहीं आए।

फ्रांसिस ने यह स्वीकार करते हुए एपोस्टोलिक पैलेस के सालाक्लेमेंटिना के कर्मचारियों के लिए आत्मविश्लेषण मापदंड जारी किए कि ईसाइयत की वैसी उपस्थिति और प्रभाव नहीं रहा जो हुआ करता था। उन्होंने कैथलिक चर्च की प्रगतिशील शाखा के नेता दिवंगत कार्डिनल कार्लो मारिया मार्टिनी का हवाला दिया जिन्होंने 2012 में अपने निधन से पूर्व आखिरी साक्षात्कार में इस बात पर अफसोस प्रकट किया था कि गिरजाघर बदलाव को अपनाने के डर के कारण 200 साल पीछे चल रहा है।

Source: International

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