महाभियोग: ट्रंप का अब क्या होगा, जानें सब

वॉशिंगटन
अमेरिका के इतिहास में आज राष्ट्रपति ट्रंप गलत कारण से हमेशा के लिए दर्ज हो गए हैं। ट्रंप के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव निचले सदन से पास हो गया। अब तक के इतिहास में सिर्फ 3 ऐसे राष्ट्रपति रहे हैं जिन्हें महाभियोग प्रक्रिया का सामना करना पड़ा। अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में यह प्रस्ताव पास हो गया है। विपक्षी डेमोक्रैट्स के बहुमत वाले हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में महाभियोग के पक्ष में 230 और विरोध में 197 वोट पड़े। अब साफ है कि के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही की जाएगी। क्या है महाभियोग की प्रक्रिया और अब ट्रंप का भविष्य क्या होगा, समझें…

अमेरिका की संसद में क्या हुआ बुधवार को अमेरिकी समय के अनुसार बुधवार को अमेरिका के निचले सदन में ट्रंप के ऊपर लगे दो आरोपों पर विस्तृत चर्चा हुई। अमेरिका के राष्ट्रपति पर पहला आरोप है कि उन्होंने करदाताओं के पैसे का प्रयोग अपने निजी हित और राजनीतिक स्वार्थ के लिए किया। उनके ऊपर दूसरा आरोप है कि इस आरोप की जांच के लिए उन्होंने कांग्रेस की जांच प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश की।

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अमेरिका का संविधान क्या कहता है इस पर
अमेरिका के संविधान प्रदत्त व्यवस्था के अनुसार ट्रंप महाभियोग प्रक्रिया के दौरान भी अपने पद पर बने रह सकते हैं। महाभियोग प्रस्ताव का सेनेट से पास होना अनिवार्य होता है। इससे पहले जिन दो राष्ट्रपति एंड्रयू जॉनसन और बिल क्लिंटन पर यह प्रस्ताव चला है, वह भी सेनेट में समर्थन के कारण आरोपमुक्त हो गए। सेनेट में इस वक्त रिपब्लिकन का ही बहुमत है। अमेरिका के संविधान के अनुसार, सेनेट में मौजूद सदस्य अगर दो तिहाई बहुमत से प्रस्ताव का समर्थन करें तभी राष्ट्रपति को पद से बर्खास्त किया जा सकता है।

ट्रंप की सत्ता सुरक्षित मानी जा रही है, एकजुट होंगे रिपब्लिकन
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि ट्रंप की सत्ता भी फिलहाल सुरक्षित रहेगी क्योंकि महाभियोग की प्रक्रिया निचले सदन में पूरी भी होने के बाद भी रिपब्लिकन बहुमत वाली सेनेट से उसका पास होना मुश्किल है। ट्रंप एक ही सूरत में हट सकते हैं, जब कम से कम 20 रिपब्लिकन सांसद उनके खिलाफ विद्रोह का झंडा उठा लें। अभी के हालात में ऐसा होना संभव नहीं दिख रहा है। अमेरिका की राजनीति के जानकारों का कहना है कि महाभियोग का प्रस्ताव रिपब्लिकंस को एकजुट कर देगा।

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डेमोक्रैट्स को पूरी प्रक्रिया से चुनावी फायदे की उम्मीद
डेमोक्रैट्स को उम्मीद है कि सार्वजनिक सुनवाई के कारण जनता को ट्रंप और विपक्ष दोनों की स्थिति जानने का मौका मिलेगा। अभी तक यह तय नहीं है कि ट्रंप पर महाभियोग प्रक्रिया का कितना असर पड़ेगा। उनकी रेटिंग्स में जरूर कुछ गिरावट आई है, लेनिक उपचुनावों को यह किस हद तक प्रभावित करेगा, इस बारे में कुछ कहा नहीं कहा जा सकता है।

सेनेट में रिपब्लिकन का बहुमत, प्रस्ताव पास होना मुश्किल
अगर निचले सदन से ट्रंप पर महाभियोग चलाने का प्रस्ताव पास भी हो जाता है तो सेनेट ट्रायल करने के फैसले के विरोध में मत दे सकती है। हाउस से प्रस्ताव होने के बाद ट्रायल अनिवार्य करने को लेकर अमेरिकी संविधान में कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं की गई है। वर्तमान में 100 सदस्यों वाले सेनेट में 53 सदस्य रिपल्बिकन के हैं और बहुमत में होने के कारण प्रस्ताव के रद्द होने की पूरी संभावना है।

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कैसे चलती है महाभियोग की पूरी प्रक्रिया
1) सार्वजनिक सुनवाई की प्रक्रिया हाउस इंटेलिजेंस कमिटी की द्वारा की जाती है।

2) 90 मिनट की पूछताछ में डेमोक्रैट्स और रिपब्लिक दोनों से ही सवाल-जवाब किए गए। दोनों ही पक्षों से 45-45 मिनट के समय में सवाल जवाब किए गए।

3) सवाल-जवाब के बाद इंटेलिजेंस कमिटी ने अपनी रिपोर्ट जूडिशरी पैनल को सौंप दी। न्यायिक समिति की अपनी सुनवाई होगी जिसमें ट्रंप और उनके अटॉर्नी को भी हिस्सा लेने की छूट थी।

4) इसके बाद जूडिशरी पैनल को ही यह फैसला लेना होता है कि राष्ट्रपति के ऊपर महाभियोग का ड्रॉफ्ट तैयार किया जाए या नहीं, जिस पर दोनों सदन में वोटिंग होगी। बहुमत से प्रस्ताव पास होता है तो सेनेट ट्रायल शुरू कर सकती है। फिलहाल निचले सदन से प्रस्ताव पास हो गया है।

महाभियोग की कार्यवाही वाले पहले राष्ट्रपति बने ट्रंप
डॉनल्ड ट्रंप से पहले अमेरिका के दो और राष्ट्रपतियों के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया हुई। 1868 में ऐंड्यू जॉनसन और 1998 में बिल क्लिंटन के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन दोनों ही नेता अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब रहे थे। इसके अलावा रिचर्ड निक्सन ने महाभियोग से पहले ही इस्तीफा दे दिया था।

Source: International

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