कबाड़ में भी नहीं बिक रहा गिनेस वाला INS विराट

रश्मि राजपूत, मुंबई
सेवा से हटाए गए भारतीय नौसेना के विमान वाहक जंगी जहाज INS विराट को ई-ऑक्शन में कोई खरीदार नहीं मिला है। नौसेना ने अपने इस सबसे पुराने एयरक्राफ्ट कैरियर को कबाड़ में बेचने के फैसले पर अमल करते हुए यह ई-ऑक्शन कराया था। इस आइकॉनिक शिप को मेरीटाइम म्यूजियम-कम-मरीन अडवेंचर सेंटर में बदलने की पुरानी योजना के तहत कोई खरीदार नहीं मिला था, जिसके बाद नीलामी कराने का फैसला लिया गया था। एक अधिकारी ने बताया, ‘INS विराट की खरीदारी के लिए उम्मीद जैसी बिड नहीं मिली, इसलिए नए सिरे से ई-ऑक्शन कराया जाएगा।’ ई-ऑक्शन में शामिल होने के लिए धरोहर राशि के तौर पर 5.30 करोड़ रुपये अग्रिम अडवांस जमा कराने थे।

महाराष्ट्र सरकार ने INS विराट को कमर्शल बिजनस कॉम्प्लेक्स में बदलने का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को नवंबर में सौंपा था। इस प्रस्ताव के मुताबिक, विराट म्यूजियम का निर्माण समुद्र में कंक्रीट की नींव डालकर किया जाना था। इसके लिए सिंधुदुर्ग जिले के निवटी रॉक्स से लगभग 7 समुद्री मील की दूरी पर एक लोकेशन तय की गई थी। इसके वास्ते टेंडर्स के नियमों और शर्तों को अंतिम रूप देने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च अधिकार प्राप्त समिति बनाई गई थी। राज्य के सचिवालय के एक अधिकारी ने बताया, ‘प्रॉजेक्ट प्राइवेट पार्टनर के साथ किया जाने वाला था, लेकिन उसमें किसी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसलिए प्रपोजल को खारिज कर उसकी जानकारी रक्षा मंत्रालय को दी गई। इसके बाद जहाज को कबाड़ में बेचने का फैसला किया गया।’

द ग्रैंड ओल्ड लेडी कहलाने वाला INS विराट लंबे समय तक इंडियन नेवी और रॉयल नेवी की सर्विस में रहा था। अप्रैल 1986 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने HMS हार्मिस को 6.3 करोड़ डॉलर में खरीदने के लिए ब्रिटेन के साथ करार किया था। HMS हार्मिस को मरम्मत और नए इक्विपमेंट से लैस करने के बाद 1987 में INS विराट के रूप में भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया था। इसका नाम दुनिया में सबसे लंबी अवधि तक सर्विस में रहने वाले जंगी जहाज के तौर पर गिनेस वर्ल्ड रेकॉर्ड बुक में दर्ज है।

भारतीय कमान में रहते हुए इस जंगी जहाज पर कई एयरक्राफ्ट्स ने 22,622 फ्लाइंग आवर्स हासिल किए हैं। इसने समंदर में लगभग 2,252 दिन बिताए और कुल 5,88,287 समुद्री मील यानी 10,94,215 किलोमीटर की दूरी तय की। इस हिसाब से विराट ने समुद्र में कुल 7 साल गुजारे हैं और पूरे विश्व की 27 बार परिक्रमा की है। जहाज की कमीशनिंग के बाद इसका बॉयलर 80,715 घंटे तक चला था। इसने 1989 में श्रीलंका में ऑपरेशन ज्यूपिटर में अहम रोल अदा किया था। 1990 में यह गढ़वाल राइफल्स और इंडियन आर्मी के स्काउट्स से भी जुड़ा था। इसने संसद पर आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के साथ तनाव बढ़ने पर 2001-02 में हुए ऑपरेशन पराक्रम के दौरान काफी सक्रियता दिखाई थी।

Source: National

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