
के अमरेली जिले का एक गांव जहां पवित्र कुरान को पढ़ने के साथ-साथ संस्कृत में भजनों का भी गायन होता है। मौका था में सुन्नी मुस्लिम दंपती तौसीफ ललिया और पिनल मुछिया के निकाह का, यहां दंपती को आशीर्वाद देने के लिए सौराष्ट्र के 15 हिंदू धर्मगुरुओं को विशेष न्योता दिया गया था। धर्मगुरु न सिर्फ वहां हुए दो दिनों के आयोजन का हिस्सा बने, बल्कि उन्होंने जार गांव से जलिया तक 35 किलोमीटर के जुलूस का भी नेतृत्व किया। इस कार्यक्रम ने की लोगों के बीच मिसाल पेश की।
दरअसल, तौसीफ के परिवार ने कुछ महीने पहले जब शादी तय हुई तभी इन धर्म गुरुओं को निमंत्रित करने का मन बना लिया था। दूल्हे के साथ दुलहन का परिवार भी इस विचार पर सहमत था। उनका मानना था कि यह हिंदू-मुस्लिम एकता का एक बड़ा उदाहरण बनेगा।
सांप्रदायिक सौहार्द में यकीन
हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से तौसीफ के चाचा रफीक ललिया कहते हैं, ‘हम सांप्रदायिक सौहार्द में यकीन रखते हैं। इसी के मद्देनजर हमने दंपती को आशीर्वाद देने के लिए हिंदू धर्मगुरुओं को आमंत्रित किया था। हम इस परंपरा को तीन पीढ़ियों से बरकरार रखे हुए हैं। हमारे पूर्वज आपा गीगा को मानने वाले थे।’
बता दें कि आपा गीगा जूनागढ़ जिले के सताधार में रहने वाले एक संत थे। ललिया का परिवार मुख्य रूप से खेती किसानी करता है और 23 वर्षीय तौसीफ उनके तीन बेटों में से सबसे छोटे हैं। तौसीफ के दो बड़े भाइयों का भी कुछ इसी तरह से निकाह हुआ था।
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Source: National

