आतंक के खिलाफ प्रयोग के लिए F-16: अमेरिका

वॉशिंगटन
अमेरिका ने पाकिस्तान द्वारा एफ-16 फाइटर जेट के दुरुपयोग को लेकर पाकिस्तान को फटकार लगाई है। पाकिस्तान को खास तौर पर सख्त अंदाज में निर्देश दिया गया कि एफ-16 लड़ाकू विमानों का दुरुपयोग नहीं किया जा सकता है। इन विमानों का प्रयोग सिर्फ आतंकवाद के खिलाफ होनेवाले ऑपरेशन में हो सकता है। इन्हें किसी दूसरे देश के खिलाफ अभियान में प्रयोग नहीं किया जा सकता। अमेरिका के हथियार नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के प्रमुख एंड्रिया थॉमसन ने इस मामले में पाकिस्तान के वायुसेना को भी पत्र लिखा था। पाकिस्तान की सैन्य जरूरतों को लेकर अमेरिका पर निर्भरता बहुत अधिक है।

के बाद चर्चा में F-16
पाकिस्तानी वायुसेना को यह पत्र अगस्त महीने में लिखा गया था, लेकिन चर्चा में अब आया है। 26 फरवरी को इसी साल पाकिस्तान और भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों की भिड़ंत हुई थी। यह भिड़ंत बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद की गई थी।

पढ़ें : पत्र की भाषा बहुत सख्त, पाक को चेतावनी
इस पत्र की भाषा बहुत सख्त है और पाकिस्तान को अमेरिका ने चेतावनी भरे अंदाज में निर्देश दिए हैं। पत्र में पाकिस्तान द्वारा अमेरिका के एफ-16 फाइटर जेट का स्थान बदलने, उनकी मेंटनेंस और उनका संचालन को लेकर आपत्ति जताई गई है। का स्थान बदलने को लेकर अमेरिका ने सख्त आपत्ति जताई है। पत्र में कहा गया, अमेरिका और पाकिस्तान के बीच हुए करार के तहत सिर्फ 2 एयरबेस मुशहाफ और शाहबाज में ही रखे जा सकते हैं। ये दोनों एयबेस पाकिस्तान के पंजाब और सिंध में हैं।

भारत के खिलाफ F-16 प्रयोग पर तीखी टिप्पणी
पाकिस्तानी वायुसेना को लताड़ लगाते हुए अमेरिका ने एफ-16 के दुरुपयोग पर नाराजगी जाहिर की। पत्र में लिखा गया है कि पाकिस्तान के पास कुल 76 एफ-16 विमान हैं। पहले विमान की सप्लाइ 1982 में की गई थी। इन लड़ाकू विमान का प्रयोग सिर्फ आतंकवाद के खिलाफ प्रयोग होनेवाले ऑपरेशन में किया जा सकता है। इन लड़ाकू विमान का प्रयोग किसी और देश के विरुद्ध ऑपरेशन में नहीं हो सकता है।

पढ़ें : विमानों की तकनीक को लेकर अमेरिका सतर्क
पाकिस्तान और अमेरिका के बीच इसी साल जुलाई में 125 मिलियन का समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत एफ-16 लड़ाकू विमानों की देखभाल और तकनीकी जांच अमेरिका द्वारा नियुक्त तकनीकी सुरक्षा टीम ही कर सकेगी। इसके लिए 60 कुशल कर्मियों की टीम पाकिस्तान में मौजूद रहेगी। अमेरिका अपने विमानों की तकनीक और फीचर्स की सुरक्षा के लिए बहुत सतर्क है। खास तौर पर रक्षा क्षेत्र में अपने प्रमुख प्रतिस्पर्धी चीन को किसी हालत में तकनीक की जानकारी साझा नहीं करना चाहता है। पाकिस्तान के चीन के साथ मजबूत संबंधों को देखते हुए अमेरिका खास तौर पर सतर्क हो गया है। चीन भी पाकिस्तान को जेएफ-17 जैसे लड़ाकू विमान सप्लाइ करता है।

Source: International

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