बचपन में कैंसर को हराया, अब ओलिंपिक की रेस में

रुपेश सिंह, नई दिल्लीयह कहानी जम्मू शहर की उस लड़की की है जिसे एक समय कैंसर जैसी घातक बीमारी ने घेर लिया था। आज वही लड़की तोक्यो ओलिंपिक्स में जगह बनाने से चंद फासले पर खड़ी है। अगर वह ओलिंपिक के लिए क्वॉलिफाई करती है तो उसका नाम हमेशा के लिए इतिहास में दर्ज हो जाएगा। हम बात कर रहे हैं की जो आज भारत की नंबर वन स्पोर्ट्स क्लाईंबर हैं।

स्पोर्ट्स क्लाईंबिंग को तोक्यो ओलिंपिक्स में शामिल किया गया है। वैसे तो यह खेल बहुत ही पुराना है लेकिन यह पहली बार है जब इस खेल को ओलिंपिक्स में जगह मिली है। कई इंटरनैशनल इवेंट में अपना परचम फहरा चुकीं 19 वर्षीय शिवानी भी बखूबी यह बात जानती हैं कि वह इन खेलों में भारत की ओर से ओलिंपिक्स में भाग लेने वाली पहली ऐथलीट बनने के बहुत करीब हैं।

9 साल की उम्र में हुई बीमारी
शिवानी बताती हैं, ‘मैं 9 साल की थी, तब मुझे पेट में बहुत दर्द रहा करता था। वहां इलाज के दौरान पता चला कि मुझे ओवेरियन कैंसर है। पापा बहुत परेशान हुए, लेकिन उन्होंने सभी को यह कह दिया कि फिलहाल कोई भी मुझे मेरी बीमारी के बारे में नहीं बताएगा। लेकिन धीरे-धीरे मुझे मेरी बीमारी के बारे में पता चल गया।’ एशियन यूथ चैंपियनशिप (2017 चीन) में सबसे कम उम्र में भारत का प्रतिनिधित्व करने का रेकॉर्ड बनाने वाली शिवानी बताती हैं, ‘इलाज के दौरान मेरे बाल उड़ गए थे। मैं बहुत कमजोर हो गई थी। सच कहूं तो मैं बहुत डर गई थी।

और मजूबत बनकर निकलींशिवानी कहती हैं, ‘पापा के विश्वास ने मेरे अंदर भी विश्वास भरा। मेरी बहन क्लाइंबिंग करती थी और ऑपरेशन के एक साल बाद ही क्लाइंबिंग के खेल में हाथ आजमाने का मैंने मन बना लिया। डॉक्टर ने मुझे इजाजत दे दी, लेकिन मेरी मां मेरी बहुत फिक्र करती थी इसलिए उन्होंने मना कर दिया। हालांकि यहां भी मेरे पापा ने मेरा साथ दिया। कैंसर से लड़ाई ने मुझे बहुत मजबूत बना दिया था और क्लाईंबिंग को प्रफेशन बनाने में मुझे ज्यादा दिक्कत नहीं हुई।’

समाज की बेड़ियां तोड़ींइस खेल से जुड़ने के लिए शिवानी को ‘लड़कियों को घर में रहने’ की सलाह देने वाले समाज की सोच से भी लड़ना पड़ा। वह कहती हैं कि आसपास के लोगों ने खेल में मुझे जाते देख कई ताने कसे। आज यह देखकर अच्छा लगता है कि जो कभी मुझे ताने मारा करते थे आज वही लोग बेटियों को घरों से बाहर मैदान पर भेज रहे हैं।’

Source: Sports

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