नागरिकता बिल से क्यों डर रहा है असम?

गुवाहाटी
नागरिकता संशोधन विधेयक पर मचे सियासी संग्राम के बीच यह बिल लोकसभा में पारित हो गया है और अब इसे मंगलवार को राज्यसभा में पेश करने की तैयारी है। इस बिल को लेकर नॉर्थ ईस्ट की जनता के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, ने सदन में मणिपुर को (आईएलपी) के तहत लाने का ऐलान कर दिया है। अब इस तरह पूर्वोत्‍तर के तीन राज्‍य अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और मणिपुर पूरी तरह से के दायरे से बाहर हो गए हैं।

बाकी के तीन और राज्‍य- नागालैंड (दीमापुर को छोड़कर जहां आईएलपी लागू नहीं है), मेघालय (शिलॉन्‍ग को छोड़कर) और त्रिपुरा (गैर आदिवासी इलाकों को छोड़कर जो संविधान की छठी अनुसूची में शामिल नहीं हैं) को नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 के प्रावधानों से कमोबेश छूट मिली हुई है।

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मणिपुर ने किया स्‍वागत
मणिपुर के सीएम एन बीरेन सिंह ने हमारे सहयोगी टाइम्‍स ऑफ इंडिया को बताया कि मणिपुर को आईएलपी के दायरे में लाने के लिए केंद्र को केवल बंगाल ईस्‍टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन, 1873 के तहत महज एक कार्यकारी आदेश भर जारी करना है। स्‍थानीय लोगों के अलावा ‘बाहरी लोग’ आईएलपी इलाकों में सीमित समय के लिए रह सकते हैं लेकिन वहां अचल संपत्ति नहीं खरीद सकते।

असम के आदिवासी इलाकों पर लागू नहीं होगा
इस तरह से नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 छठी अनुसूची के तहत आने वाले तीन आदिवासी इलाकों (बीटीसी, कर्बी-अंगलोंग और दीमा हसाओ) के अलावा असम के सभी हिस्‍सों पर लागू होगा। इन आदिवासी इलाकों पर स्‍वायत्‍त जिला परिषदों का शासन है।

शाह बोले- जानबूझकर डर फैला रहे हैं लोग
सोमवार को लोकसभा में अमित शाह ने अरुणाचल, मिजोरम और नागालैंड (दीमापुर के अलावा) का हवाला देते हुए कहा, ‘इस विधेयक की सही जानकारी के अभाव में या फिर जानबूझकर नॉर्थ ईस्‍ट के लोगों के मन में डर फैलाने की कोशिश हो रही है। जो इलाके बंगाल ईस्‍टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन, 1873 के तहत आते हैं उन्‍हें घबराने की जरूरत नहीं है क्‍योंकि विधेयक वहां लागू नहीं होगा।’

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‘मणिपुर की भावनाओं को ध्‍यान में रखा’
उन्‍होंने आगे कहा कि सरकार ने मणिपुर के लोगों की भावनाओं को ध्‍यान में रखकर उसे नागरिकता संशोधन विधेयक से बाहर रखने का फैसला किया है। शाह ने कहा, ‘यह मणिपुर घाटी के लोगों की लंबे समय से मांग थी। मैं इस पुरानी मांग को मानने के लिए मणिपुर की जनता की आरे से प्रधानमंत्री को धन्‍यवाद देता हूं।’

नागरिकता मिलते ही लगेगी कार्रवाई पर रोक
गृहमंत्री ने कहा नागरिकता संशोधन विधेयक पाकिस्‍तान, बांग्‍लादेश और अफगानिस्‍तान के छह धार्मिक अल्‍पसंख्‍यक प्रवासियों को न केवल उनके भारत आगमन की तारीख से भारतीय नागरिकता प्रदान करता है भले ही उनके पास इसके दस्‍तावेज न हों, बल्कि यह भी प्रस्‍तावित करता है कि नागरिकता मिलने पर उनके खिलाफ अधिवास, अवैध प्रवास और नागरिकता से जुड़ी सभी लंबित कार्रवाइयों पर रोक लगा दी जाएगी।

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कांग्रेस सरकारों को घेरा
असम के मुद्दे पर शाह ने पिछली कांग्रेस सरकारों पर हमला करते हुए कहा कि उन्‍होंने राजीव गांधी सरकार द्वारा किए गए असम समझौते को लागू करने के लिए कुछ खास नहीं किया। उन्‍होंने पूछा, ‘आपने एनआरसी लागू किया, आपने अनुच्‍छेद 6 लागू किया? नहीं।’ शाह ने जोर देते हुए कहा, ‘नागरिकता संशोधन विधेयक में नॉर्थ ईस्‍ट के सभी राज्‍यों की चिंताओं को ध्‍यान में रखा गया है।’

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नॉर्थ ईस्ट के लिए अलग से प्रावधान
नागरिकता संशोधन बिल में संविधान की छठी अनुसूची में शामिल असम, मेघालय और त्रिपुरा के साथ-साथ इनरलाइन परमिट की जरूरत से जुड़े मणिपुर, मिजोरम, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश जैसे इलाकों को इससे छूट दी गई है।

क्या है इनर लाइन परमिट
इनर लाइन परमिट ईस्टर्न फ्रंटियर विनियम 1873 के अंतर्गत जारी किया जाने वाला एक ट्रैवल डॉक्युमेंट है। भारत में भारतीय नागरिकों के लिए बने इनर लाइन परमिट के इस नियम को ब्रिटिश सरकार ने बनाया था। बाद में देश की स्वतंत्रा के बाद समय-समय पर फेरबदल कर इसे जारी रखा गया। यह मुख्यत: दो तरह का होता है। पहला, पर्यटन की दृष्टि से बनाया जाने वाला एक अल्पकालिक आईएलपी। दूसरा, नौकरी, रोजगार के लिए दूसरे राज्यों के नागरिकों के लिए बनाया जाने वाला आईएलपी।

बिल की प्रमुख बातें:
-यह बिल पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान में धर्म के आधार पर प्रताड़ित होने वाले छह गैर मुस्लिम अल्पसंख्यकों-हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध, पारसी व -ईसाइयों को भारत की नागरिकता देने से जुड़ा है।
-नागरिकता कानून 1955 में बदलाव किया जा रहा है। प्रस्ताव के मुताबिक अगर अल्पसंख्यक एक साल से लेकर 6 साल तक शरणार्थी बनकर भारत में रहें हैं -तो उन्हें भारत की नागरिकता दे दी जाएगी।
-पहले 11 साल रहने पर नागरिकता मिलती थी। अवैध तरीके से प्रवेश करने के बावजूद नागरिकता पाने के हकदार रहेंगे।
-इस बिल में नागरिकता मिलने की बेस लाइन 31 दिसंबर 2014 रखी गई है। यानी इस अवधि के बाद इन तीन देशों से आने वाले अल्पसंख्यकों को 6 साल तक भारत में रहने के बाद नागरिकता मिल जाएगी।
-नॉर्थ ईस्ट के राज्यों के लिए छूट का अलग से प्रावधान किया गया है।
(टाइम्‍स ऑफ इंडिया के इनपुट के साथ)

Source: National

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