ईसीबी के अधिकारियों से मिलने गांगुली, शाह जाएंगे लंदन

के. श्रीनिवास राव, मुंबई भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष और सचिव इस सप्ताह के अधिकारियों से मुलाकात करने के लिए लंदन जाएंगे। भारतीय क्रिकेट बोर्ड में कार्यभार संभालने के बाद गांगुली ने कहा था कि उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती से बीसीसीआई को उसका वाजिब शेयर दिलाना है।

बीसीसीआई के दो नवनिर्वाचित पदाधिकारी इंग्लैंड ऐंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) के अधिकारियों से मिलेंगे जहां 12 दिसंबर को लंदन में उनकी बैठक होनी है। ईसीबी के चेयरमैन चेयरमैन कॉलिन ग्रेव्स से भी उनकी मुलाकात होनी है जिन्होंने आईसीसी को लिखकर फ्यूचर टूर प्रोग्राम (एफटीपी) के अगले मसौदे पर नाराजगी व्यक्त की थी।

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शाह को हाल में बीसीसीआई की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में आईसीसी की कार्यकारी समिति के लिए भारत का प्रतिनिधि चुना गया था। गांगुली की ब्रिटेन यात्रा में हालांकि सब कुछ काम ही नहीं है। इसकी जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा, ‘वह (गांगुली) इंग्लैंड की एक निजी यात्रा करने वाले थे। आगामी यात्रा के दौरान वह साथ काम भी करेंगे क्योंकि वह लंदन में ही रहेंगे। जय उनके साथ रहेंगे।’

हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि ईसीबी एफटीपी ड्राफ्ट से नाराजगी के चलते आईसीसी के सदस्यों की भागीदारी समझौते (एमपीए) पर हस्ताक्षर करने को राजी नहीं था। इस रिपोर्ट के एक सप्ताह के भीतर ही ग्रेव्स ने आईसीसी के सीईओ मनु साहनी को लिखकर इसके बारे में जानकारी दी।

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आईसीसी ने कहा है कि अगर उसे भारत में आयोजित हुए 2016 वर्ल्ड टी20 के लिए कर छूट नहीं मिली तो वह बीसीसीआई के वार्षिक राजस्व का एक हिस्सा काटेगा। क्रिकेट की इस वैश्विक संस्था ने बीसीसीआई को सूचित किया है कि 2021 में होने वाले टी20 वर्ल्ड कप और 2023 में 50 ओवर के वर्ल्ड कप के लिए मेजबानी के लिए उसकी स्थिति संदेह में है, अगर इन दोनों के लिए उसे टैक्स में छूट की गारंटी नहीं दी जाती है।

दूसरी ओर बीसीसीआई ने यह स्पष्ट तौर पर कहा है कि टैक्स में छूट उनका काम नहीं है, बल्कि पूरी तरह से भारत सरकार का है। बीसीसीआई सूत्रों ने कहा, ‘अब यहां बात यह भी है आईसीसी के अध्यक्ष (शशांक मनोहर) भारत के हैं। वह दो बार बीसीसीआई अध्यक्ष रहे। वह दो दशकों से अधिक समय से भारत में क्रिकेट प्रशासन से जुड़े हैं। इसके अलावा वह एक वकील भी हैं और इन पेचीदगियों को बेहतर तरीके से समझते हैं।’

ईसीबी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि इंग्लैंड आईसीसी की योजना में साझेदार नहीं है और ऐसे में गांगुली और शाह की आगामी यात्रा ‘दोस्ताना’ बैठक की तरह लगती है। दोनों क्रिकेट बोर्डों ने इसे जाहिर किया है कि वे एमपीए पर हस्ताक्षर करने से बच सकते हैं। यदि ऐसा किया जाता है, तो इसका ऐतिहासिक प्रभाव पड़ सकता है।

Source: Sports

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