
खेल प्रशासन की लापरवाही की वजह से ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी फुटबॉल टूर्नमेंट में हिस्सा लेने जालंधर गई दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) की टीम बिना मैच खेले वापस आ गई। ताज्जुब की बात यह है कि इस टूर्नमेंट में हिस्सा लेने टीम बिना कोच और मैनेजर के पहुंची थी। ऐसे में खिलाड़ी अपनी फरियाद भी किसी से नहीं कर सकते थे।
जामिया के कोच को थी जिम्मेदारी
टीम के एक सदस्य ने बताया कि मैच से पहले एलिजिबिलिटी फॉर्म भड़ना पड़ता है। दिल्ली यूनिवर्सिटी ने हमें फॉर्म दे रखा था केवल वहां चेक करवाना था कि जिन खिलाड़ियों का नाम आया है, वही हैं कि नहीं। हमारे साथ डीयू के कोच नहीं थे इसलिए जामिया यूनिवर्सिटी के कोच को ही हमारी भी जिम्मेदारी दे दी गई थी। कोच ने ही हमारी एलिजिबिलिटी चेक नहीं करवाई, जिसके चलते हमें खेलने को नहीं मिला। अगर हमारे साथ अपने कोच होते तो शायद हमें खेलने को मिल जाता। हमें यह भी पता था कि हमारे साथ बीआर आंबेडकर कॉलेज के कमलेश शर्मा सर बतौर मैनेजर जाएंगे, लेकिन वह भी नहीं गए। हमें ग्राउंड पर उतरने से ठीक पहले बताया गया कि दूसरी टीम को वॉकओवर दे दिया गया है। आप लोग वापस घर जाओ।
कनवीनर को पता भी नहींइस मामले में जब NBT ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्पोर्ट्स कनवीनर अनिल कुमार कलकल से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि टीम के साथ निर्मल सिंह को बतौर कोच और कमलेश शर्मा को बतौर कन्वीनियर भेजा गया था। जहां तक मुझे जानकारी है कि बच्चे वहां से मैच खेलकर आए हैं। अगर आप कह रहे हैं कि उन्हें बिना खेले वापस भेज दिया गया है तो इसकी जानकारी मुझे नहीं है। गुरुवार को बच्चों का एग्जाम था, इसलिए मैं मिल नहीं पाया। मैं शुक्रवार को बच्चों से मिलने के बाद ही इस बारे में कुछ बता पाऊंगा।
पहले ही कर दिया था मनादूसरी ओर जब कमलेश शर्मा से पूछा गया मैंने तो उन्होंने कहा कि मैंने इंटर कॉलेज करवाया और टीम का सिलेक्शन कर दिया। इसके बाद मैंने यूनिवर्सिटी को बोल दिया था कि मैं टीम के साथ नहीं जा पाऊंगा, किसी और को भेज देना। अब अगर टीम के साथ कोई नहीं गया तो इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
Source: Sports

