
विशेषज्ञों की समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस न्यायमूर्ति मुकुंदकम शर्मा (रिटायर्ड) करेंगे। इस पैनल में (आईओए) के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। आईओए ने इस मसौदे को मौजूदा रूप में लागू करने से इनकार कर दिया था क्योंकि वह खेल प्रशासकों पर उम्र और कार्यकाल संबंधित सीमा लगाना चाहता है।
खेल मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, ‘समिति पारदर्शिता और स्वायत्तता की जरूरत के लिए एनएसएफ (राष्ट्रीय खेल महासंघों) की स्वायत्तता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करेगी।’ एनएसएफ की ओर से प्रतिनिधित्व भारतीय मुक्केबाजी महासंघ के अध्यक्ष अजय सिंह, सुधांशु मित्तल (भारतीय खो खो महासंघ) और बीपी बैश्य (भारतीय भारोत्तोलन महासंघ) करेंगे। भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) या उसका एक प्रतिनिधि, संयुक्त सचिव (खेल) और डॉ ए जयतिलक (केरल सरकार के खेल मामलों के प्रधान सचिव) पैनल के अन्य सदस्य होंगे।
समिति का गठन इसलिए किया गया है कि वे खेल संहिता के लिए कुछ सुझाव दें ताकि यह सभी शेयरधारकों को स्वीकार्य हो। आईओए का मानना है कि मौजूदा संहिता को अपनाने से भारत पर अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति द्वारा निलंबन का खतरा है।
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