ईरान ने अरामको पर हमले की ऐसे रची साजिश!

तेहरान
सऊदी अरब स्थित दुनिया के सबसे बड़े तेल प्रसंस्करण प्रतिष्ठान पर ड्रोनों और मिसाइलों के हमले से चार महीने पहले ईरान के सुरक्षा अधिकारी तेहरान के एक अभेद्य किले में इकट्ठा हुए। इस समूह में ईरानी सेना की अभिजात्य शाखा इस्लामिक रिवॉल्युशनरी गार्ड कॉर्प्स के शीर्ष अधिकारी शामिल थे जिनमें मिसाइल बनाने वालों और गुप्त अभियानों को अंजाम देने वालों की मौजूदगी बेहद खास थी।

‘तलवारें निकालने का वक्त आ गया’
मई महीने के उस दिन चर्चा का विषय था कि परमाणु संधि से हटने और ईरान पर दोबारा कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को लागू करने के लिए अमेरिका को दंडित किया कैसे किया जाए। ईरान अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। रिवॉल्युशनरी गार्ड्स के प्रमुख मेजर जनरल हुसैन सलामी की मौजूदगी में एक सीनियर कमांडर मंच पर आया। उसने कहा, ‘तलवारें निकालने और उन्हें सबक सिखाने का वक्त आ गया है।’

ऐसे आया पर हमले का प्रस्ताव
इस मीटिंग में मौजूद कट्टर सोच रखने वालों ने अमेरिकी सैन्य कैंपों समेत बेहद संवेदनशील ठिकानों पर हमले का सुझाव दिया। लेकिन, आखिरकार ऐसी योजना पर सहमति बनी जिससे प्रत्यक्ष संघर्ष की आशंका को टाला जा सके और अमेरिका को भयावह प्रतिक्रिया देने पर मजबूर नहीं किया जाए। ऐसे में ईरान ने अमेरिका के सहयोगी सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों पर हमले का प्रस्ताव सामने आया। शीर्ष ईरानी सैन्य अधिकारियों ने इस प्रस्ताव पर विचार किया।

चार अधिकारियों ने किया प्लान का खुलासा
इस मीटिंग में शामिल हुए तीन अधिकारियों और ईरानी नीति-निर्माताओं के एक करीबी ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को 14 सितंबर को सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको के प्रतिष्ठान पर हमले की साजिश में ईरानी नेताओं की भूमिका बताई। उन चारों लोगों ने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयतुल्ला अली खुमैनी ने कड़ी शर्तों के साथ इस अभियान को स्वीकृति प्रदान की। उन्होंने किसी सऊदी नागरिक या अमेरिकी को निशाना नहीं बनाने से बचने की सख्त हिदायत दी थी। रॉयटर्स से बात करने वाले उन ईरानी अधिकारियों ने कहा कि तेहरान इस अभियान के परिणाम से बेहद खुश हुआ।

रिपोर्ट को खारिज करने में जुटा ईरान
हालांकि, रॉयटर्स को दिए उन चारों के बयान को संयुक्त राष्ट्र में ईरानी मिशन के प्रवक्ता ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ईरान ने इन हमलों में कोई भूमिका अदा नहीं की और इस तरह के अभियान पर कोई वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों की कोई मीटिंग नहीं हुई थी और न ही खुमैनी ने हमले की स्वीकृति दी थी। प्रवक्ता ने रॉयटर्स के सवाल पर कहा, ‘नहीं, नहीं, नहीं, नहीं, नहीं, और नहीं।’ वहीं, सऊदी सरकार के कम्यूनिकेशन ऑफिस ने इस पर टिप्पणी करने के आग्रह पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

अमेरिका ने रिपोर्ट पर क्या कहा?
यूएस सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी और पेंटागन ने भी कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रॉयटर्स की रिपोर्ट पर प्रत्यक्ष टिप्पणी तो नहीं की, लेकिन कहा कि तेहरान का व्यवहार एवं भीषण हमलों और आतंकवाद को समर्थन का उसका दशकों का इतिहास कुछ ऐसा ही है। ईरान से संबंधित यमन का हुती विद्रोहियों ने सऊदी अरामको के तेल प्रतिष्ठान पर हमले की जिम्मेदारी ली थी। अमेरिका ने इस दावे को खारिज कर दिया था। वहीं, सऊदी अरब के अधिकारियों ने कहा कि जिस सफाई से हमला किया गया है, उससे ईरान के हाथ होने का संकेत मिलता है।

Source: International

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