महाराष्ट्र में प्रोटेम स्पीकर कौन? 'खेल' बाकी

मुंबई
महाराष्ट्र की सियासी लड़ाई पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए देवेंद्र फडणवीस की सरकार को बहुमत साबित करने के लिए बुधवार का दिन दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि पहले विधायकों को शपथ दिलाएगा और उसके बाद फ्लोर टेस्ट भी उसी की निगरानी में होगा। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति पर कोई शर्त भी नहीं रखी है। ऐसे में प्रोटेम स्पीकर की जिम्मेदारी अब अहम होगी। फिलहाल राज्यपाल के पास 6 नामों की सिफारिश भेजी गई है।

प्रोटेम स्पीकर, आमतौर पर अस्थायी विधानसभा अध्यक्ष होता है जो चुनाव के बाद पहले सत्र में स्थायी अध्यक्ष या उपाध्यक्ष का चुनाव होने तक संसद या विधानसभा का संचालन करते हैं। प्रोटेम स्पीकर तब तक अपने पद पर बना रहता है जब तक सदस्य स्थायी अध्यक्ष का चुनाव न कर लें। आमतौर पर सदन के सबसे वरिष्ठ नेता को प्रोटेम स्पीकर चुना जाता है। फ्लोर टेस्ट के दौरान बहुमत के खेल में प्रोटेम स्पीकर का बड़ा रोल होता है।

प्रोटेम स्पीकर का रोलअमूमन प्रोटेम स्पीकर का काम सदस्यों को शपथ दिलाना होता है। आम तौर पर फ्लोर टेस्ट स्पीकर के सामने होता है, मगर कुछ परिस्थितियों में कोर्ट के आदेश पर प्रोटेम स्पीकर के सामने भी फ्लोर टेस्ट होता है। इस बार महाराष्ट्र में प्रोटेम स्पीकर की निगरानी में बहुमत परीक्षण होने जा रहा है। ऐसा पूर्व में भी होता आया है।

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किस दल से होगा प्रोटेम स्पीकर?
ऐसे में सवाल है किस दल के विधायक को यह जिम्मेदारी दी जाएगी? वैसे वरिष्ठता के आधार पर देखें तो कांग्रेस के बालासाहेब थोराट का पलड़ा भारी है और वह सदन में सबसे अनुभवी हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह नहीं साफ किया है कि कौन प्रोटेम स्पीकर होगा। ऐसे में सबकुछ राज्यपाल कोश्यारी के फैसले पर निर्भर करेगा। पिछली कुछ बार से ऐसा देखा गया है कि जिस दल का प्रोटेम स्पीकर होता है, वही दल सत्ता की कुर्सी तक पहुंचा है। विधानसभा के नए सदस्यों को विधायक पद की शपथ दिलाने के लिए प्रोटेम स्पीकर नियुक्त करने के लिए विधानमंडल ने राज्यपाल के पास छह वरिष्ठ सदस्यों के नामों का प्रस्ताव भेजा है। इनमें से किसी एक को राज्यपाल प्रोटेम स्पीकर चुनेंगे।

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इन 6 नामों की सिफारिश
जिन 6 नेताओं के नाम भेजे गए हैं उनमें राधाकृष्ण विखे पाटील, कालिदास कोलंबकर, बबनराव पाचपुते, बालासाहेब थोराट, केसी पाडवी और दिलीप वलसे पाटील शामिल हैं। बता दें कि प्रोटेम स्पीकर के लिए विधान मंडल चुने हुए नामों का सुझाव मुख्यमंत्री को देता है। इसके बाद मुख्यमंत्री राज्यपाल के सामने तीन-चार नामों की सिफारिश करते हैं। प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति राज्यपाल तय करते हैं।

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बालासाहेब थोराट सबसे वरिष्ठ नेता
288 विधायकों में से थोराट एकमात्र ऐसे विधायक हैं तो अपना आठवीं बार विधायक चुने गए हैं। एनसीपी के दिलीप वलसे पाटील, जयंत पाटील, अजित पवार, कांग्रेस के केसी पाडवी, बीजेपी के कालिदास कोलंबकर और बबनराव पाचपुते सातवीं बार के विधायक हैं। जबकि पिछली विधानसभा के स्पीकर और बीजेपी नेता हरिभाऊ बागडे, एनसीपी के छगन भुजबल और बीजेपी के राधाकृष्ण विखे-पाटील 6 बार विधायक रह चुके हैं।

हरिभाऊ बागडे को प्रोटेम स्पीकर बनाने के पक्ष में बीजेपी
यह भी सामने आ रहा है कि बीजेपी हरिभाऊ बागडे को स्पीकर बनाना चाहती है। प्रोटेम स्पीकर के पास स्पीकर की तुलना में कम शक्तियां होती हैं लेकिन बीजेपी सरकार अपने ही विधायक को नए विधायकों को शपथ दिलाने और फ्लोर टेस्ट कराने के लिए हरसंभव कोशिश करेगी।

Source: National

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