मैंने सोच लिया था जो बाकी कपूर करते हैं, वह नहीं करूंगा: अनिल कपूर

‘मेरे लिए अपने सारे सपने पूरे करने के लिए एक जिंदगी कम है। मैं खुशकिस्मत रहा हूं कि मुझे हमेशा बेहतरीन डायरेक्टर्स के साथ काम करने का मौका मिला। फिल्ममेकिंग एक टीम वर्क है और मैं गर्व से कहता हूं कि मैं हमेशा डायरेक्टर का ऐक्टर रहा हूं। मैं दिल से मानता हूं कि डायरेक्टर ही फिल्म का कैप्टन होता है। मैंने 1977 में मैंने पहली बार कैमरा फेस किया था, लेकिन अभी मैं बहुत कुछ करना चाहता हूं।’ अपने दिल की यह ख्वाहिश ऐक्टर अनिल कपूर ने गोवा के पणजी में चल रहे सिनेमा के सबसे बड़े समारोह 50वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में जाहिर की। वह यहां अपने दोस्त और निर्देशक अनीस बज्मी के साथ ‘डायरेक्टर्स ऐक्टर’ विषय पर चर्चा कर रहे थे।

‘सेंट ऑफ अ वुमन’ रीमेक करना चाहता हूं
बकौल अनिल कपूर, ‘ऐसी बहुत सी फिल्में और किरदार हैं, जो मैंने करना चाहूंगा। शुरू में मैं मार्लन ब्रांडो का बड़ा प्रशंसक रहा हूं। इसके अलावा, दिलीप कुमार, राज कपूर, देव साहब, शम्मी कपूर इन लोगों ने जैसा काम किया। वहीं, बाद के टाइम में टॉम हैंक्स की फिलाडेल्फिया, कास्ट अवे, फॉरेस्ट गंप जैसी फिल्में, अल पचीनो की फिल्में, डेनियल डे लुइस की सभी फिल्में, जैसे फैंटम थ्रेड, लिंकन वैसी फिल्में करना चाहूंगा। नसीरुद्दीन शाह की फिल्में जैसे ‘स्पर्श’, मैंने अपनी जिंदगी में कभी अंधे आदमी का किरदार नहीं किया। मैं इंतजार कर रहा हूं, कई कहानियां आईं भी, लेकिन कोई मुझे पसंद नहीं आईं।’

‘मैंने अपने एजेंट्स और इंटरनैशनल फ्रेंड्स से बात भी की है कि अगर मुझे अल पचीनो की ‘सेंट ऑफ अ वुमन’ के राइट्स मिल सकें। इसके अलावा, तमाम फिल्में और किरदार हैं, जो मैं करना चाहता हूं।’ वहीं, यह पूछने पर कि डिजिटल युग में क्या अनिल कपूर को लगता है कि उनकी किसी फिल्म पर वेब सीरीज बन सकती है, तो उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि मेरी कई फिल्मों को वेब-सीरीज में तब्दील किया जा सकता है। जैसे, नायक और मिस्टर इंडिया वेब सीरीज में ढाली जा सकती हैं। इनकी कहानियां आगे बढ़ाई जा सकती हैं।’ वहीं, अनीस बज्मी ने बताया कि वह अपनी टीम के साथ मिलकर तीन सीजन की एक वेब-सीरीज लिख रहे हैं।

अपना सरनेम सबसे बड़ा नुकसान लगा
अपने चालीस साल के करियर में अनिल कपूर ने हर तरह के किरदार निभाए हैं। अपनी इतनी लंबी और सफल फिल्मी पारी का राज खोलेते हुए अनिल कपूर ने बताया, ‘जब मैंने अपना करियर शुरू किया, तो अपना सरनेम कपूर मुझे सबसे बड़ा डिस्अडवांटेज (नुकसान) लगा। मैंने तभी सोच लिया था कि मैं वह वही करूंगा, जो कोई कपूर नहीं कर रहा है। मैं ‘कपूरियत’ नहीं करूंगा। मुझे अलग मुकाम बनाना है, तो मैं सिर्फ श्याम बेनेगल, मृणाल सेन, एम एस सथ्यू, मणिरत्नम जैसे सीरियस फिल्ममेकर्स से मिलता था। मैं चाहता था कि लोग समझें कि मैं सीरियस ऐक्टर हूं, जो कि मैं तब था, आज भी हूं। लोग जिसे टिपिकल फिल्में समझते हैं, जो ज्यादा मुश्किल होती हैं मेरे हिसाब से, वे फिल्में जो कपूर करते हैं, इतनी जबरदस्त करते हैं कि उनके जैसा काम करने वाला न पैदा हुआ है न होगा, वह उनके अंदर कुदरती है। मुझे लगा कि मेरे में वो बात नहीं है। इसलिए, मैंने सीरियस फिल्में करनी शुरू की। छोटे-छोटे रोल किए। साउथ की फिल्में कीं।’

‘जब पहली फिल्म वो सात दिन मिली, तो मुझे लगा कि मुझे करैक्टर करना है। मैंने रास्ते के नाई से बाल कटाए, चोर बाजार से कपड़े लिए, ताकि स्टार न दिखूं, किरदार दिखूं। उस समय फिल्मी ऐक्टर होने लोग थोड़ा नीचा मानते थे, इसलिए मैंने सोचा था कि मैं फिल्मी ऐक्टर नहीं बनूंगा, तो मैंने मशाल, मेरी जंग जैसी फिल्में कीं। फिर धीरे-धीरे जब कॉन्फिडेंस बढ़ता गया, तब मैंने सोचा कि अब मैं फिल्मी करता हूं। छोटी उम्र में वह सोच थी, वह प्लानिंग थी, उससे मैंने अपनी नींव बनाई। फिर, हर दस-पंद्रह साल में मैंने कुछ अलग करने की कोशिश की। रिस्क लिया, भले ही वे फिल्में नहीं चली, लेकिन मैं खुद को रीइंवेंट किया। हर दस साल में कुछ नया करता रहा, बाकी कंवेंशनल काम भी किए। यह मेरी लंबी पारी का राज है।’

‘बालिका वधू’ के ऑडिशन में फेल हो गया
अनिल कपूर ने करियर की शुरुआत में कन्नड़, तमिल जैसी साउथ की फिल्में की भी हैं। वहीं, वह बंगाली फिल्म ‘बालिका वधू’ की रीमेक भी करना चाहते थे। उन्होंने बताया, ‘बालिका वधू’ बंगाली में बहुत बड़ी हिट थी। तरुण मजूमदार साहब ने डायरेक्ट की थी। मैं वह फिल्म करना चाहता था। मैं चैंबूर से बस पकड़कर नटराज स्टुडियो गया। मुझे धोती-कुर्ता पहनाया गया। मेरा ऑडिशन किया, लेकिन मैं ऑडिशन में फेल हो गया। उन्होंने सचिन को लिया, मुझे नहीं लिया। उसका गाना ‘बड़े अच्छे लगते हैं’ आज भी बहुत मशहूर है। मुझे लगा कि फिल्म भले नहीं की, ये गाना मुझे करना चाहिए था (हंसते हैं)।’

फेस्टिवल के मंच पर फिल्म का प्रमोशन भी
इवेंट के दौरान अनिल कपूर और अनीस बज्मी शुक्रवार को रिलीज अपनी फिल्म पागलपंती को प्रमोट करना भी नहीं भूले। यही नहीं, सेशन की मॉटरेटर टिस्का चोपड़ा ने भी बाकायदा लोगों से फिल्म देखने की अपील भी की।

Source: Bollywood

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