पिंक बॉल टेस्ट: यूं ही नहीं चुना गया ईडन गार्डन्स

अर्चिमन भादुड़ी, कोलकाताबीसीसीआई अध्यक्ष ने जब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के सामने डे-नाइट टेस्ट मैच का प्रस्ताव रखा तो उस पर विचार के लिए बोर्ड ने समय लिया। भारत और बांग्लादेश के बीच सीरीज का दूसरा और अंतिम टेस्ट मैच शुक्रवार से डे-नाइट फॉर्मेट में खेला जाएगा।

जब टीम ढाका से इस दौरे के लिए रवाना हो रही थी, उससे एक दिन पहले ही बीसीबी अपने खिलाड़ियों को इस फॉर्मेट में खेलने के बारे में समझाने में कामयाब रहा। तब मैच के लिए सिर्फ तीन हफ्ते का समय बचा था।

क्यूरेटर की कड़ी मेहनतसाइक्लोन बुलबुल के कारण कोलकाता शहर में इस टेस्ट मैच की तैयारियों में बाधा भी आई। पिच क्यूरेटर सुजान मुखर्जी और उनकी टीम ने तीन साल पहले देश के पहले आधिकारिक पिंक-बॉल मैच- CAB सुपर लीग फाइनल के लिए मैदान तैयार किया था। इसी टीम को पहले डे-नाइट टेस्ट मैच के लिए पिच को तैयार करना था जिन्होंने काफी मेहनत से काम को पूरा किया। अब ईडन गार्डन्स भारत के पहले पिक बॉल टेस्ट मैच के लिए तैयार है, जो शुक्रवार से शुरू होगा। बीसीसीआई के मुख्य क्यूरेटर आशीष भौमिक पिच को देखने के लिए कोलकाता शहर में वापस आ गए हैं।

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गांगुली ने यूं ही नहीं चुना ईडनकई विशेषज्ञों का मानना है कि गांगुली ने गुलाबी गेंद के टेस्ट के लिए सबसे उपयुक्त जगह का चयन किया है क्योंकि ईडन गार्डन्स में इसे सफल बनाने के लिए सभी चीजें मौजूद हैं। पिंक बॉल अब भी ज्यादा नहीं बनाई जाती हैं, कम से कम भारत में तो फिलहाल इस बॉल का प्रचलन नहीं है। इसलिए अब भी कई बातों को लेकर चिंता हैं। डे-नाइट मैच दलीप ट्रोफी के दौरान तीनों सेशन में कूकाबूरा गेंदों के साथ खेले गए थे लेकिन आगामी टेस्ट मैच के लिए एसजी गेंदों का उपयोग किया जाएगा।

काली मिट्टी से चिकनी सतहगुलाबी गेंद के साथ मुख्य समस्या इसकी उम्र (खेलने का समय) रही है। पारंपरिक लाल गेंद को लेदर से ज्यादा रंग मिलता है, तो वहीं पिंक बॉल मुख्य रूप से एक रंगीन उत्पाद है। जितना अधिक इसका उपयोग किया जाता है, संभावना है कि यह अपना मूल रंग खो देती है। लाल गेंद के मैट फिनिश के बजाय, गुलाबी रंग में बाहरी चमक होती है और ऐसे में घास एक अहम भूमिका निभाती है। ईडन पिच में पहले से ही एक अच्छा ग्रास कवर (घास) है लेकिन यहां हरा आउटफील्ड है जो गेंद को लंबे समय तक चलने में मदद करेगा। इसके अलावा, यहां की काली मिट्टी एक चिकनी सतह बनाती है जो गेंद की बाहरी सतह को भी देर तक खेलने में मदद करेगी।

ईडन की मिट्टी सबसे अलगदलीप ट्रोफी के मैचों के दौरान गेंद के अपना रंग और आकार तेजी से खोने के बारे में शिकायतें मिली थीं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ईडन पर ऐसा होने की संभावना नहीं है। एक ग्राउंड्समैन ने कहा, ‘उत्तर भारत की मिट्टी ईडन गार्डन्स (कोलकाता) से काफी अलग है। यह संभवत: गुलाबी गेंद से होने वाले क्रिकेट मैचों के लिए सबसे उपयुक्त है।’

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मैदान पर असमान उछालक्यूरेटर मुखर्जी और उनकी टीम के सदस्यों के लिए बड़ी मुश्किल सही जल संतुलन बनाए रखना है। पिछले कुछ दिनों से पानी नहीं डालने से तेज धूप ने ऊपरी सतह को सूखा बना दिया है लेकिन देश के इस हिस्से में मानसून के लंबे समय तक रहने और बुलबुल के प्रभाव के कारण सतह के नीचे पानी रह सकता है जो मैदान पर कुछ असमान उछाल पैदा कर सकता है।

ओस की अहम भूमिकाआउटफील्ड में सतह के नीचे की यही पानी सूर्यास्त के बाद ओस की तरह रहेगा। हालांकि विशेषज्ञों को लगता है कि ओस इस मैच में भूमिका निभा सकती है। ग्राउंड्समैन हालांकि ऐंटी ड्यू स्प्रे के साथ रहेंगे। बल्लेबाज ओस में खेलने को लेकर पसंद करेंगे, क्योंकि इससे गेंद गीली हो जाएगी और सूर्यास्त के बाद स्विंग की संभावना कम हो जाएगी। अगर यह सूखी रहती है, तो बल्लेबाजी करना मुश्किल हो सकता है।

टॉस जीते तो चुनेंगे बल्लेबाजीटॉस जीतने वाली टीम के कप्तान पहले बल्लेबाजी करना पसंद कर सकते हैं, क्योंकि मुकाबला दोपहर में 1 बजे शुरू होगा। ईडन में लंच और टीम के बीच के समय बल्लेबाजी करना ऐतिहासिक तौर पर बेहतर माना जाता है। अगर इस दौरान किसी भी टीम को अपनी पारी शुरू करनी होती है, तो शीर्ष क्रम का झुकाव बल्लेबाजी होगी।

रिवर्स स्विंग नहीं होगीजो भी टेस्ट का परिणाम हो सकता है, विशेषज्ञ लगभग दो चीजों के बारे में निश्चित हैं – स्पिनरों के लिए लगभग कोई भूमिका नहीं होगी और रिवर्स स्विंग भी नहीं होगी। रिवर्स स्विंग केवल तब होती है जब गेंद का एक हिस्सा खुरदरा हो जाता है लेकिन चमकदार गेंद से ऐसा संभव नहीं है।

Source: Sports

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