धनतेरस यमराजजी से संबंध रखने वाला व्रत है
धनतेरस में धन शब्द स्वास्थ्य के देवता धनवंतरी से लिया गया है!
कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन ही भगवान धन्वन्तरि का अवतार हुआ था इसलिए इस तिथि को धनतेरस के नाम से जाना जाता है।
देवी लक्ष्मी तो वैसे धन की देवी हैं परन्तु लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए आपको स्वास्थ्य और लम्बी आयु भी चाहिए यही कारण है कि दीपावली दो दिन पहले से ही धनतेरस से ही दीपामालाएं सजने लगती हें।
समुद्र मंथन के समय धन्वन्तरि जी कलश में अमृत लेकर प्रकट हुए थे इसी कारण इस दिन बर्तन खरीदने की परम्परा है
धनतेरस में चांदी खरीदने का महत्त्व है चांदी खरीदना शुभ भी है!
इस दिन चांदी खरीदने के पीछे यह कारण माना जाता है कि चांदी चन्द्रमा का प्रतीक है जो शीतलता प्रदान करता है और मन में संतोष रूपी धन का वास होता है।
संतोष को सबसे बड़ा धन कहा गया है। जिसके पास संतोष है वह स्वस्थ है सुखी है और वही सबसे धनवान है।
भगवान धन्वन्तरी जो चिकित्सा के देवता भी हैं उनसे स्वास्थ्य और सेहत की कामना के लिए संतोष रूपी धन से बड़ा कोई धन नहीं है।
धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरी की और मृत्यु के देवता यमराज की पूजा का महत्व होता है !
भारतीय संस्कृति में स्वास्थ्य का स्थान धन से ऊपर माना जाता रहा हैं ! यह कहावत आज भी प्रचलित है कि पहला सुख निरोगी काया, दूजा सुख घर मे माया इस लिए दीपावली में सबसे पहले धनतेरस को महत्व दिया गया है ! जो भारतीय संस्कृति के हिसाब से बिल्कुल अनुकूल है !
शास्त्रो में वर्णित कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन भगवान धन्वंतरि जी का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है जो समुद्रमंथन के समय अमृत का कलश लेकर प्राणियो को रोग मुक्त करने के लिये प्रगट हुए थे ।
भगवान धनवंतरी विष्णु जी के अंशावतार हैं ! संसार में चिकित्सा विज्ञान के विस्तार और प्रसार के लिए ही भगवान विष्णु ने धनवंतरी का अवतार लिया था ! भगवान धनवंतरी जी के प्रकट होने के उपलक्ष्य में धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है !
एकबार यमराज जी से दूत ने पूछा क्या अकालमृत्यु से बचने का कोई उपाय नही है ? यमराज ने अकाल मृत्यु से बचने का उपाय बताते हुए कहा- धनतेरस के पूजन एवं दीपदान को विधिपूर्वक करने से अकाल मृत्यु से छुटकारा मिलता है !
इसलिए धनतेरस को यमराज जी कि पूजा और यमराज जी के निमित्त दीपदान से अकाल मृत्यु (असामयिक मृत्यु) नही होती है।
यमपूजन दीपदान
धनतेरस के दिन सायंकाल घर के मुख्य दरवाजे पर एक पात्र मे अन्न रख कर उसके उपर यमराज के लिए दक्षिण कि ओर मुख करके दीप जलाकर फ़ुल, कुम्कुम ,चावल, धूप से पूजा कर के दीप दान करना चाहिये और यमराज जी को प्रणाम करना चाहिये।
मै यमराज के निमित्त दीपदान कर रहा हूँ, भगवान देवी श्यामा सहित मुझ पर प्रसन्न हो ऐसा बोलकर उस अनाज के ऊपर यमराज के निमित्त दीपक जलायें और नीचे लिखे मंत्र का उच्चारण करते हुए गंध-पुष्पादि से पूजन करें
मृत्युना पाशहस्तेन कालेन भार्यया सह ।
त्रयोदश्यां दीपदानात्सुर्यज: प्रीयतामिति।।
जिस घर में यह पूजन होता है, वहा अकाल मृत्यु का भय पास भी नही फटकता !
धनतेरस के दिन धनवंतरी पूजन सहित दीपदान का आरम्भ हुआ !!
यमुना जी यमराज जी कि बहन है इसलिये इस दिन यमुना स्नान का भी महत्त्व है
आज स्वास्थ्य के देव धन्वंतरी जी का पुजन करें जो आरोग्य देने वाले हैं
सिर्फ धन ही नही धन्वन्तरि जी की भी पुजा की जाय क्योकि स्वास्थ्य नही तो धन बेकार है ।
अब त्योहारों का सिर्फ व्यपारिकरण ही दिखाई दे रहा है चारो तरफ
धनतेरस के महत्त्व को समझे सिर्फ खरीदारी में ही न लगे रहे !!
दीप दान करे दीप प्रज्वलित करें।
झालर या विद्युत बल्ब नही दीपों का त्योहार और महत्त्व है इसीलिए तो दीपोत्सव कहा जाता है!!

